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गलवां घाटी की तरह भारत-नेपाल सीमा पर भी नो मैंस लैंड पर बसे गांव, सीमा निर्धारण के पिलर भी गायब

Thu, 25 Jun 2020 01:55 PM IST
ishwar ashish विभाकर शुक्ला, अमर उजाला, श्रावस्ती।
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नो मैंन लैंड पर बसा गांव। - फोटो : amar ujala
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चीन द्वारा भारत की सीमा में अवैध घुसपैठ की खबरों के बीच भारत नेपाल सीमा पर भी अतिक्रमण हो रहा है। हालांकि, यह दोनों तरफ से है। श्रावस्ती के 62 किलोमीटर से लगे नो मैंस लैंड पर अवैध रूप से बसे गांवों में दोनों देशों के लोग पूरे सद्भाव से रह रहे हैं। पहले जहां इक्की-दुक्की झोपड़ियां हुआ करती थीं वहां अब पूरी आबादी बस गई है। सीमा निर्धारण के लिए लगे पिलर गायब हो रहे हैं। भारतीय अधिकारी केवल मामले की जांच की बात कह रहे हैं, वहीं सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के अफसर कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।

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भारत व नेपाल की सीमा तय करते समय छोड़ी गई 60 फीट चौड़ी जमीन की पट्टी (नो मैंस लैंड) पर मकान बनने के साथ अब वहां अवैध रूप से खेती भी हो रही है। कुछ स्थानों पर बाग-बगीचे लगे हैं। इस अतिक्रमण के लिए दोनों देश के नागरिक जिम्मेदार हैं। जिले में भरथा रोशन गढ़ व ककरदरी की स्थिति सबसे खराब है। यहां सीमा के दोनों ओर ऐसी बस्तियां बस गई हैं, जैसे क्षेत्र का कोई गांव हो।

इस अतिक्रमण पर प्रशासनिक अनदेखी आने वाले दिनों में सीमा विवाद का कारण बन सकती है। वहीं सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी संभल रहा एसएसबी अपनी तैनाती की समय से कोई भी कब्जा न होने की बात कह रहा है।

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प्रशासन ने कहा कि गांव बसने की जानकारी नहीं

जिले के ककरदरी, कोदिया, घुड़दौरिया, रोशनगढ़ व भारतीय सुइया क्षेत्र के नो मैंस लैंड लगभग खत्म होने को हैं। वहीं नेपाल की ओर से उल्लनासपुरवा, शंकरनगर कोटिया, नेपाली घुड़दौरिया व रोश्यानगढ़, बनिया गांव महतनिया व नेपाली सुइया गांव की स्थिति ज्यादा चिंताजनक है।

मामले पर एडीएम योगानंद पांडेय का कहना है कि गायब पिलरों की सूचना तो एसएसबी की ओर से मिली थी। इस संबंध में शासन की ओर से कार्रवाई की जा रही है। गांव बसने की जानकारी नहीं है। इस पर एसएसबी के उच्चाधिकारियों से वार्ता करके कुछ कहा जा सकता है।
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