हजरतगंज चौराहे के पास पूर्व विधायक जिप्पी तिवारी के बेटे वैभव को गोली से उड़ाने के आरोपी हिस्ट्रीशीटर विक्रम सिंह और प्रॉपर्टी डीलर सूरज शुक्ला ने वकील की मध्यस्थता पर मंगलवार दोपहर खुद को पुलिस के हवाले कर दिया।
एनकाउंटर के खौफ से कद्दावर की शरण में पहुंचे दोनों अपराधी कोर्ट में आत्मसमर्पण की तैयारी में थे। पुलिस ने पकड़ने के लिए नाकाबंदी के साथ वकीलों से बातचीत शुरू की। जान बख्शने की डील फाइनल होने पर दोनों आरोपी पुलिस को सौंप दिए गए।
हाई सिक्योरिटी जोन में पूर्व विधायक के बेटे की हत्या के मामले में ताबड़तोड़ दबिशें और इनाम घोषित होते ही हिस्ट्रीशीटर विक्रम सिंह को एनकाउंटर का अंदेशा हो गया।
पुलिस के दांवपेंच से वाकिफ रिटायर्ड दरोगा का बेटा विक्रम जानता था कि सूरज के साथ रहने तक ही उसकी जान सुरक्षित है, क्योंकि सूरज का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। उसे साथ लेकर कद्दावर की शरण में पहुंचा और रविवार को वकील से बात करके कोर्ट में आत्मसमर्पण की तैयारी शुरू की।
उसके इरादों से वाकिफ पुलिस ने भी वकीलों से संपर्क करके संगीन वारदात को लेकर हो रही फजीहत का हवाला देकर दोनों आरोपियों को सौंपने की पेशकश की। वहीं, एनकाउंटर का अंदेशा जता रहे विक्रम ने वकील से कोर्ट में ही हाजिर कराने को कहा।
कचहरी के चारों तरफ नाकाबंदी
पुलिस की एक टीम वकीलों से सोमवार सुबह से बातचीत में जुटी थी और छह टीमें विक्रम व सूरज की तलाश में दबिश दे रही थीं। सोमवार देर रात तक दोनों आरोपियों का कोई सुराग न लगने पर एसएसपी ने उन्हें कचहरी के पास से पकड़ने की रणनीति तैयार की। कचहरी के सभी प्रवेशद्वार पर मंगलवार सुबह से ही पुलिस व क्राइम ब्रांच की टीम तैनात की। हिस्ट्रीशीटर विक्रम सिंह को पहचानने वाले पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई। कचहरी में दाखिल होने वाले हर व्यक्ति पर पुलिस की नजर थी। सड़क के दूसरी तरफ खड़ी गाड़ियों में पुलिसकर्मी मुस्तैद थे। इशारा मिलते ही विक्रम और सूरज को उठाकर गाड़ी में लाद ले जाने की तैयारी थी।
कोर्ट में आत्मसमर्पण का वक्त बीतने पर खेल
कचहरी के सभी प्रवेशद्वार पर पुलिस की नाकाबंदी की विक्रम को भनक लग गई। पुलिस की नजर से बचकर कचहरी में दाखिल होना मुश्किल नजर आने लगा। चेहरे पर मफलर लपेटे दोनों अपराधी एक कार की पिछली सीट पर दुबके थे। उनके वकील भी सतर्क हो गए। उधर, एसओ वजीरगंज पंकज कुमार सिंह ने कचहरी में जाकर वकील से बातचीत शुरू की। खींचतान में दोपहर के 1:30 बज गए। कोर्ट में आत्मसमर्पण का वक्त बीतने के साथ गेट पर तैनात पुलिसकर्मी मायूस हो गए। उधर, विक्रम व सूरज के वकील ने दोनों की जान बख्शने की डील फाइनल की और वकीलों के जत्थे के बीच दोनों आरोपियों ने कचहरी में प्रवेश किया और वकील के चैंबर में जा पहुंचे। दोनों को गिरफ्त में लेकर पुलिस टीम कचहरी से निकली।
पिस्टल-कार बरामद करने को पुलिस कस्टडी रिमांड
इंस्पेक्टर हजरतगंज आनंद कुमार शाही ने हाथ आए विक्रम सिंह और सूरज शुक्ला की हजरतगंज इलाके से गिरफ्तारी की लिखापढ़ी की। दोनों को देर शाम सीजेएम कोर्ट में पेश करने के साथ हत्या में इस्तेमाल पिस्टल व कार बरामद करने के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड की अर्जी दी। विक्रम व सूरज के वकील ने पुलिस कस्टडी रिमांड के विरोध में बहस की। सीजेएम ने दोनों की तीन दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड स्वीकृत करते हुए शुक्रवार शाम 7:30 बजे तक जेल में दाखिल करने का आदेश दिया।