चारबाग स्थित उत्तर रेलवे मंडल चिकित्सालय में दवा खरीद से जुड़े दस्तावेजों के गायब होने की सूचना पर रेलवे की विजिलेंस की टीम ने गुरुवार को एक बार फिर छापा मारा।
गुरुवार विजिलेंस की टीम दिन भर अस्पताल में बैठी रही। हालांकि अस्पताल के कर्मचारी दवा खरीद से जुड़े दस्तावेज विजिलेंस टीम को नहीं सौंप सके।
मंडल रेल अस्पताल इंडोर में वर्ष 2002 से 2013 तक लोकल परचेज पर दवाओं की खरीद से जुड़े दस्तावेज गायब हो गए हैं।
इसकी एफआईआर डॉक्टर राकेश गुप्ता ने आलमबाग पुलिस थाने पर दो माह पहले दर्ज करायी है। अंदेशा है कि अस्पताल में नियमों को ताक पर रखकर पिछले 11 सालों में लाखों रुपये की दवाओं की खरीद की गई है।
अस्पताल में दवाएं मंगवाए बिना ही मेडिकल स्टोर को भुगतान कर दिया गया। इन मामलों की पड़ताल करने के लिए रेलवे बोर्ड की विजिलेंस टीम दो दिनों से लखनऊ में डेरा डाले हुए है।
विजिलेंस को यहां हर साल खरीदी जाने वाली दवाओं का ऑडिट करना है। रेलवे हर साल 6 करोड़ रुपये इस अस्पताल को दवाओं के लिए जारी करती है। जबकि केवल सालाना एक करोड़ रुपये की ही दवाओं की खरीदारी की जा जाती है।
बुधवार को भी विजिलेंस ने अस्पताल में छापा मारा था लेकिन दवाओं की खरीद से जुड़े कागज उसे नहीं मिल सके थे। गुरुवार को भी विजिलेंस की टीम ने छापा मारा लेकिन इन 11 साल में खरीदी गई 66 करोड़ रुपये की दवाओं से जुड़े दस्तावेज नहीं दिये गए।
उधर अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. यूए बंसल ने मामले से अनभिज्ञता जताते हुए कहा है कि उनके अस्पताल में किसी तरह के दस्तावेज गायब नहीं हुए हैं। विजिलेंस के छापे की भी कोई सूचना नहीं है।