यूपीसीडा में हुई भर्तियों में धांधली की जांच विजिलेंस को सौंप दी गई है। ये भर्तियां वर्ष 2008-09 में हुई थीं। बाद में पता चला कि अधिकतर पदों पर अपात्रों को नौकरियां दे दी गईं। न्यूनतम अर्हता और तय मानकों तक का ख्याल नहीं रखा गया। इन गड़बड़ियों में तत्कालीन सीईओ समेत छह अधिकारियों का नाम सामने आ रहा है। नतीजतन, जांच विजिलेंस से कराने का निर्णय लिया गया।
बसपा शासन में 2008-09 में उत्तर प्रदेश स्टेट इंडस्ट्रियल डवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीसीडा) में 179 पदों पर भर्तियां हुई थीं। ये पद समूह ‘ग’ व ‘घ’ के थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन नियुक्तियों में नियम-कायदों का पालन करने के बजाय सिफारिश को तरजीह दी गई। कई अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच तक नहीं की गई। कई चयनित अभ्यर्थी ऐसे भी हैं, जो तब निर्धारित योग्यता भी पूरी नहीं करते थे।
आला अधिकारियों की संलिप्तता
शासन के सूत्रों के मुताबिक, पूरे प्रकरण में तत्कालीन सीईओ, एसीईओ के अलावा महाप्रबंधक और सहायक महाप्रबंधक स्तर के अधिकारियों की संलिप्तता मिली है। विभागीय अधिकारियों का भी कहना है कि विजिलेंस की जांच में कई अधिकारियों के अलावा गलत ढंग से नियुक्ति पाने वाले कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई तय है। अपर मुख्य सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास अरविंद कुमार ने बताया कि जांच की संस्तुति अपर मुख्य सचिव, विजिलेंस को भेज दी गई है।