उप समिति की रिपोर्ट में संयोजक विनोद कटियार ने कहा है कि कुल पांच में से शुरुआती तीन विकास अनुबंध के रिकॉर्ड की जमीनी हकीकत देखी गयी। यहां डीपीआर के मुताबिक काम ही नही हुए हैं।
यहां शासन की नीति के मुताबिक कुल 2,356 ईडब्लूएस और एलआईजी मकान बनाए जाने थे। इसमें से सिर्फ 1,040 का निर्माण हुआ है। वहीं केवल 96 का आवंटन कर कब्जा दिया गया। इनकी भी हालत जर्जर बनी हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आवंटियों को 18 होल का गोल्फ कोर्स बताकर संपत्ति बेची गई। जबकि मौके पर 9 होल का ही गोल्फ कोर्स है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अंसल को जो 311 एकड़ जमीन प्रोजेक्ट पूरा नहीं होने पर नुकसान की भरपाई के लिए एलडीए में बंधक बनानी थी, उसमें से भी 129 एकड़ जमीन बिल्डर ने बेच डाली। ऐसे में आवंटियों के हित सीधे तौर पर प्रभावित हुए।
रिपोर्ट में ये भी बताया है कि जो पूर्व वीसी अंसल एपीआई को फायदा पहुंचा रहे थे। वहीं सेवानिवृत्ति के बाद में अंसल कंपनी में बड़े पद पर अधिकारी बन गए। उनकी भूमिका की गहन जांच की जरूरत संयोजक विनोद कटियार ने बताई है।
. सड़कों की चौड़ाई बाइलॉज के मुताबिक नहीं
. ग्रीन एरिया और पार्क तक मानक के मुताबिक नहीं
. एलडीए में बंधक जमीन भी बेच ली
. एससी-एसटी की जमीन बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के खरीदी
. बिल्डर ने एक्स्ट्रा एफएआर लिया लेकिन इसका फायदा आवंटियों को नहीं दिया
. सीवर, ड्रेनेज, अग्निशमन जैसे विकास नहीं हुए
मंगलवार को होगी सुनवाई
याचिका समिति ने अब एलडीए और आवास विभाग के अधिकारियों को उप समिति के उठाये सवालों पर जवाब मांगा है। मंगलवार को याचिका समिति बिल्डर कंपनी को दी गयी सहूलियत से लेकर बंधक जमीन को बेचे जाने, ले-आउट के मुताबिक विकास कार्य नहीं होने पर सुनवाई करेगी। इसमें प्रमुख सचिव आवास नितिन रमेश गोकर्ण और एलडीए वीसी प्रभु एन सिंह को बुलाया गया है।