विधायक बनने के बाद भी ठेकेदारी करने वाले बसपा विधायक उमा शंकर सिंह व भाजपा विधायक बजरंग बहादुर की विधानसभा सदस्यता खतरे में पड़ गई है।
जांच में विधायक बनने के बाद दोनों विधायकों के ठेकेदारी करते रहने की पुष्टि हो चुकी है।
इसीलिए लोक आयुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने मुख्यमंत्री से इन्हें विधानसभा की सदस्यता के अयोग्य घोषित करने की सिफारिश की है।
विधायकों को अयोग्य घोषित करने के संबंध में निर्णय राज्यपाल को करना है।
इसलिए लोक आयुक्त ने मंगलवार को मुख्यमंत्री को भेजी गई अपनी अंतरिम रिपोर्ट में मामला राज्यपाल को संदर्भित करने को कहा है। लोक आयुक्त ने सरकार को रिपोर्ट पर एक माह में कार्यवाही करके अवगत कराने को कहा है।
बलिया के सुभाष चंद्र सिंह उर्फ क्रांतिकारी ने लोक आयुक्त से उमाशंकर की शिकायत करते हुए विधायक बनने के बाद भी ठेकेदारी करने का आरोप लगाया है।
शिकायत में उमाशंकर सिंह के कई साझीदारों का उल्लेख करते हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी व टी राम की भी हिस्सेदारी का आरोप है।
हालांकि जांच के दौरान शिकायतकर्ता नसीमुद्दीन व टी राम की हिस्सेदारी के बारे में कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं करा सके है। जांच शुरू होने के बाद भाजपा विधायक भी इसके लपेटे में आ गए।
लोक आयुक्त ने 15 मार्च 2015 के बाद विधायकों द्वारा ठेके दारी करने पर ही अपनी जांच केंद्रित रखी क्योंकि कानूनन विधायक बनने के बाद वे ठेकेदारी नहीं कर सकते।