18 दिसंबर से शुरू हो रहे विधानंडल के शीतकालीन सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं। सदन के भीतर विपक्षी पार्टियों ने सरकार को कानून-व्यवस्था और किसानों के मुद्दों पर घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। सपा, बसपा और कांग्रेस ने सोमवार को अपने-अपने विधानमंडल दल की बैठक बुलाई है। इसमें विस्तार से रणनीति तय की जाएगी। हालांकि सत्र अंत्यत संक्षिप्त होगा। सरकार की प्राथमिकता अनुपूरक बजट पास कराने की होगी।
विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन ने कहा कि बुलंदशहर की घटना से साफ हो गया है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। भाजपा से जुड़े संगठन ही माहौल खराब कर रहे हैं। किसानों की आय दोगुना करने का वादा भी झूठा साबित हुआ है।
न तो किसानों का धान खरीदा जा रहा है और न ही गन्ने के मूल्य बढ़ाए गए। जबकि, गन्ने की लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है। सपा शासन में प्रारंभ हो चुकी भर्तियां भी अटकी हुई हैं। शिक्षक भर्ती परीक्षा में जिस तरह से कापियां जलाई गईं, उससे सरकार की पारदर्शी व्यवस्था के दावों की भी कलई खुल गई है।
नौजवान रोजगार के लिए भटक रहा है। अहमद हसन ने कहा कि इन मुद्दों को सदन के भीतर और बाहर प्रमुखता से उठाया जाएगा। सोमवार को दिन में करीब तीन बजे सपा विधानमंडल दल की बैठक होगी।
बसपा के विधानमंडल दल के नेता लालजी वर्मा ने बताया कि सोमवार को शाम सात बजे पार्टी कार्यालय पर विधानमंडल दल की बैठक बुलाई गई है। उन्होंने कहा कि बसपा बुलंदशहर की घटना के साथ-साथ गन्ना मूल्य और धान खरीद के मुद्दे को सदन में प्रमुखता से उठाएगी।
कांग्रेस के विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू ने बताया कि सोमवार को उन्होंने भी कांग्रेस सदस्यों की बैठक बुलाई है। कानून-व्यवस्था, गन्ना किसान और धान खरीद के साथ-साथ पुरानी पेंशन बहाली की मांग कांग्रेस के मुख्य मुद्दे होंगे।