हादसे की पीड़ित कामिनी दुबे, अंश कौशिक, होटल स्टाफ श्रवण कुमार, फायरमैन चंद्रेश यादव व प्रदीप मौर्या
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राजधानी लखनऊ के हजरतगंज स्थित होटल लिवाना में सोमवार सुबह लगी आग से हड़कंप मच गया। हादसे में चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई तो कई झुलस गए जिनका लखनऊ के सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा है।
बताया जा रहा है कि आग सुबह करीब साढ़े सात बजे लगी। होटल में यात्री ठहरे हुए थे। हादसे के पीड़ितों ने बताया कि जब आंख खुली तो कमरे में धुआं भरा हुआ था जिसके कारण घुटन हो रही थी। धुएं में दम घुटने से कई लोग बेहोश हो गए हैं। राहत व बचाव कार्य के दौरान कई दमकलकर्मी भी बेहोश हो गए।
हादसे की पीड़िता कामिनी दुबे ने बताया कि वह प्रथम तलपर थीं। सुबह 7 बजकर 45 मिनट पर आंख खुली तो कमरे में धुआं भरा हुआ था। रिसेप्शन पर फोन किया तो पता चला कि आग लगी है। तुरंत बालकनी की ओर गई। खिड़की लॉक थी तो शीशा तोड़कर बालकनी पहुंचीं। वहां से फायर की सीढ़ियों से नीचे उतरीं।
यूनिक लिकर कंपनी के चेयरमैन नोएडा निवासी अंश कौशिक ने बताया कि वह तीसरी मंजिल पर थे। करीब सवा आठ बजे उनकी आंखें खुलीं। वह रात 12 बजे के बाद आए थे। वह खिड़की का कांच तोड़कर बालकनी में उतरे। वहां से आवाज लगाई। करीब आधे घंटे के बाद फायर ब्रिगेड की सीढ़ियों से नीचे उतरे और उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
हादसे के शिकार होटल कर्मचारी श्रवण कुमार ने बताया कि कई लोगों को निकालने के चक्कर में बेहोश हो गए। उन्हें सांस लेने में समस्या हो रही है।
फायरमैन चंद्रेश यादव राहत व बचाव कार्य के दौरान आग की चपेट में आ गए। वह बोले कि लोगों को बचाने के लिए अंदर गए थे। आंख में जलन और सांस लेने में समस्या हो रही थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि बचाव कार्य के दौरान ऐसा होता रहता है।
फायरमैन प्रदीप मौर्या ने बताया कि कुछ साल पहले ट्रॉमा सेंटर में लगी आग के दौरान भी घायल हुए थे। आज फिर से वही मंजर घूम गया जब उनको भी अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।