कमेटी ने ऑनलाइन वार्षिक परीक्षा को ज्यादा व्यावहारिक नहीं माना है। कहा कि इसमें काफी खर्च आएगा। काफी स्टूडेंट्स ग्रामीण परिक्षेत्र से हैं। उनके लिए काफी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पड़ेगी। सभी विवि पहले अंतिम वर्ष के स्टूडेंट्स की और फिर अन्य की परीक्षा कराएं। परीक्षा तीन पालियों में हो। पेपर 2-2 घंटे के कराए जाएं। बहुत जरूरी हो तभी बहु विकल्पीय प्रश्नों पर आधारित परीक्षा कराएं।
मूल्यांकन डिजिटल हो, इससे परिणाम जल्द आएगा। यदि ये संभव न हो तो केंद्रीय मूल्यांकन केंद्र न बनाकर विकेंद्रीकृत व्यवस्था की जाए। शोध छात्रों को लॉकडाउन की अवधि का अतिरिक्त समय दिया जाए। कमेटी ने यह भी सुझाव दिया कि इन बदलावों को लागू करने से पहले छात्र व शिक्षक संगठनों से भी चर्चा कर ली जाए।