श्रीराम जन्मभूमि मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय से हिंदुओं के पक्ष में फैसला आने के बाद इस आंदोलन की सूत्रधार विश्व हिंदू परिषद ने वर्तमान और भविष्य को अयोध्या आंदोलन के अतीत के गवाहों व किरदारों से रूबरू कराने का फैसला किया है। इसके तहत 1984 से 92 तक और वर्ष 1992 के बाद से इस संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाने वाले कारसेवकों के सम्मान में समारोह आयोजित करने का निर्णय किया है।
फैसला किया गया है कि इस आंदोलन में मारे गए कारसेवकों के परिजनों का सम्मान किया जाएगा जबकि बुजुर्ग हो चुके कारसेवकों के घर या गांव पर जाकर सम्मान किया जाएगा। जो अभी स्वस्थ हैं और चलते-फिरते है उन्हें उनके नजदीक स्थानों पर बुलाकर सम्मान समारोह आयोजित किए जाएंगे।
दरअसल, राम कोठारी और शरद कोठारी सहित कई ऐसे नाम रहे हैं जिनकी 30 अक्टूबर 1990 और 2 अक्टूबर 1992 को अयोध्या में कारसेवा आंदोलन के दौरान पुलिस की गोली से मौत हो गई थी। कुछ कारसेवकों की 1992 में भी ढांचा गिरने के दौरान चोट लगने से मौत हो गई थी। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद विहिप इन घटनाओं से आज की पीढ़ी को अवगत कराना चाहती है ताकि उन्हें श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के महत्व की जानकारी समझ में आ सके।
विहिप के रणनीतिकारों का मानना है कि इस जानकारी से ही हिंदुओं की भावी पीढ़ी को हिंदुत्व की सांस्कृतिक और राजनीतिक जागरूकता की चुकाई गई कीमत समझ में आएगी। साथ ही यह संदेश जाएगा कि इस आंदोलन की कीमत चुकाने वाले परिवारों को हिंदू समाज भूला नहीं है।
इस तरह आयोजित होंगे कार्यक्रम
विहिप के क्षेत्र संगठन मंत्री अंबरीष कारसेवकों के सम्मान कार्यक्रम आयोजित करने की पुष्टि करते हैं। वह कहते हैं कि विहिप सांस्कृतिक पुनुरुत्थान के लिए संकल्पबद्ध है। भगवान श्रीराम भारतीय संस्कृति के प्रतीक हैं। इसलिए श्रीराम जन्मभूमि स्थान की मुक्ति और उसे पाने के लिए हिंदू समाज के जितने लोगों ने बलिदान या उपना योगदान दिया, उन सबका सम्मान कर आज की और भावी पीढ़ी को उनकी जानकारी देना हमारी जिम्मेदारी है।
विहिप अपनी इसी जिम्मेदारी को पूरा कर रही है। इस बीच, पता चला है कि विहिप ने 1984 से 92 तक के कारसेवकों का सम्मान करने के लिए किसी न किसी को इनके घर भेजने या उनकी सुविधानुसार स्थान पर सम्मान समारोह आयोजित करने की योजना बनाई है। साथ ही जो कारसेवक अब संसार में ही नहीं है।
उनके परिवार की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उनके घर, गांव व शहर में किया जाएगा जबकि 1992 के बाद वाले कारसेवकों को जिले में निश्चित स्थानों पर बुलाकर सम्मानित किया जाएगा। हालांकि इनमें भी यदि कोई चलने-फिरने लाचार हो गया होगा तो उसका सम्मान भी उसके घर या उसकी सुविधानुसार स्थान पर किया जाएगा।
कहीं यह वजह तो नहीं
ऐसा लगता है कि विहिप श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से हिंदुओं में आई चेतना को भावी पीढ़ी के लिए इसलिए भी बचाकर रखना चाहती ताकि हिंदुत्व की ताकत कमजोर न होने पाए। साथ ही राजनीतिक समीकरणों में भी हिंदुत्व से जुड़े मुददों की अनदेखी करने की किसी की हिम्मत किसी की न पड़े।
विहिप की इस चिंता को इस संगठन के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा की इन बातों से समझा जा सकता है। वह कहते हैं कि हिंदू समाज पर हो रहे हमलों का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। धर्मांतरण, घुसपैठ और धोखा देकर हिंदू लड़कियों से विवाह जैसे तमाम षडयंत्रों से हिंदू समाज को अपमानित करने का अभियान चल रहा है।
यह अभियान सिर्फ हिंदुओं को कमजोर करने का नहीं बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को खत्म करने का षडयंत्र है। देशविरोधी ताकतें इसकी आड़ में राष्ट्रवादी ताकतों को कमजोर करके देश को भी कमजोर करना चाहती है।