विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा कहते हैं कि रामजन्नभूमि पर भव्य मंदिर बनाने की तिथि साधु-संत ही तय करेंगे। संतों का मार्गदर्शन मिलते ही विहिप एक क्षण भी देर नहीं लगाएगी। धर्मसभा में फैसला संतों को लेना है। उनके मार्गदर्शन से ही पत्रक तैयार कर बांटा जा रहा है।
'माहौल न खराब करें, जो विकास हो रहा है उसे होने दें'
अयोध्या विवाद के हर क्षण को अपनी आंखों में संजोए बुजुर्ग राम प्रसाद पांडेय कहते हैं कि भव्य मंदिर निर्माण उनका ही नहीं सभी हिंदुओं का स्वप्न है, लेकिन अब इस पर सिर्फ राजनीति हो रही है। भीड़ जुटाकर माहौल खराब करने से अयोध्या का तो नुकसान ही होगा। यह बंद होना चाहिए।
अयोध्या व्यापार मंडल के अध्यक्ष नंद कुमार गुप्त व व्यापारी शैलेंद्र गुप्त कहते हैं कि डेढ़ साल में भाजपा अयोध्या में विकास के लिए कई योजनाएं लाई है। जो अब मूर्त रूप ले रही हैं। मुख्यमंत्री के बार-बार आने व दीपोत्सव से कारोबार को लेकर बेहद उम्दा माहौल बना है। मंदिर के नाम पर राजनीति करने वालों से अनुरोध है कि वो अब बस करें। अयोध्या में विकास हो रहा है, उसे होने दें।
मोहम्मद तौफीक व असलम सिद्दीकी कहते हैं कि बाबरी मस्जिद ढहाने से पहले जैसा माहौल बनाकर विहिप दहशत फैला रही है। लोग पलायन के लिए मजबूर हो रहे हैं। जबकि केंद्र व राज्य में भाजपा की सरकार है तो मंदिर का हल क्यों नहीं निकाल लेते। विहिप के पर्चे संवैधानिक व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं, फिर भी सब चुप हैं।
विहिप की धर्मसभा में देश के कोने-कोने संत-धर्माचार्य शामिल होंगे। विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने बताया कि सभा में अभी तक शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती, हंसदेवाचार्य, रामभद्राचार्य, कृष्णाचार्य, साध्वी ऋतंभरा, युगपुरुष स्वामी परमानंद, महामंडलेश्वर अखिलेश्वरानंद, आर्य समाज के स्वामी विवेकानंद सहित सुब्रहमण्यम स्वामी, विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार सहित संघ के सह सर कार्यवाहक दत्तात्रय होसबोले के भी पहुंचने की संभावना है।