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यूपी के सभी सहकारी बैंकों का विलय कर एक बैंक बनाने की तैयारी में सरकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 19 Nov 2018 05:50 AM IST
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प्रदेश सरकार सरकारी नियंत्रण में अलग-अलग नाम से संचालित सहकारी बैंकों के विलय पर विचार कर रही है। सहकारिता विभाग के नियंत्रण में केवल एक ही बैंक रखने का प्रस्ताव है। इस बारे में नीति बनाने के लिए भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) लखनऊ के एसोसिएट प्रोफेसर विकास श्रीवास्तव के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी से दो महीने में सहकारिता विभाग को अपनी संस्तुतियां देने को कहा गया है।

 सहकारिता विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यह कमेटी बैंकों केविलय की विस्तृत समीक्षा कर खूबियों, कमजोरियों, अवसरों और चुनौतियों को सामने लाएगी। मानव संसाधन क्षेत्र में नीतियां, संस्थाओं व सहकारी बैंकों में तकनीकी विकास के वर्तमान स्तर की समीक्षा करते हुए तकनीकी व्यवस्था, पैक्स समितियों के व्यवसाय व प्रस्तावित बैंक के स्वरूप के संबंध में विस्तृत अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगी। आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता कमेटी की रिपोर्ट का परीक्षण कर शासन को अपनी संस्तुतियां उपलब्ध कराएंगे। शासन कैबिनेट के जरिये इस पर अंतिम निर्णय करेगा।



प्रमुख सचिव सहकारिता एमबीएस रामी रेड्डी ने कमेटी के सदस्य के रूप में शामिल होने वाले संस्थानों, सेवानिवृत्त विशेषज्ञ सदस्यों के पारिश्रमिक का निर्धारण आयुक्त एवं निबंधक को करने के लिए अधिकृत किया है। आयुक्त निबंधक तय पारिश्रमिक का भुगतान यूपी कोऑपरेटिव बैंक द्वारा करेंगे। कमेटी में सचिव/सीईओ, कार्यरत/सेवानिवृत्त जिला सहकारी बैंक का नामांकन आयुक्त एवं निबंधक स्तर से होगा।

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प्रदेश सरकार सरकारी नियंत्रण में अलग-अलग नाम से संचालित सहकारी बैंकों के विलय पर विचार कर रही है। सहकारिता विभाग के नियंत्रण में केवल एक ही बैंक रखने का प्रस्ताव है। इस बारे में नीति बनाने के लिए भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) लखनऊ के एसोसिएट प्रोफेसर विकास श्रीवास्तव के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी से दो महीने में सहकारिता विभाग को अपनी संस्तुतियां देने को कहा गया है।

 सहकारिता विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यह कमेटी बैंकों केविलय की विस्तृत समीक्षा कर खूबियों, कमजोरियों, अवसरों और चुनौतियों को सामने लाएगी। मानव संसाधन क्षेत्र में नीतियां, संस्थाओं व सहकारी बैंकों में तकनीकी विकास के वर्तमान स्तर की समीक्षा करते हुए तकनीकी व्यवस्था, पैक्स समितियों के व्यवसाय व प्रस्तावित बैंक के स्वरूप के संबंध में विस्तृत अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगी। आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता कमेटी की रिपोर्ट का परीक्षण कर शासन को अपनी संस्तुतियां उपलब्ध कराएंगे। शासन कैबिनेट के जरिये इस पर अंतिम निर्णय करेगा।

प्रमुख सचिव सहकारिता एमबीएस रामी रेड्डी ने कमेटी के सदस्य के रूप में शामिल होने वाले संस्थानों, सेवानिवृत्त विशेषज्ञ सदस्यों के पारिश्रमिक का निर्धारण आयुक्त एवं निबंधक को करने के लिए अधिकृत किया है। आयुक्त निबंधक तय पारिश्रमिक का भुगतान यूपी कोऑपरेटिव बैंक द्वारा करेंगे। कमेटी में सचिव/सीईओ, कार्यरत/सेवानिवृत्त जिला सहकारी बैंक का नामांकन आयुक्त एवं निबंधक स्तर से होगा।

इन बैंकों को मिलाकर एक बनाने का प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक
50 जिला सहकारी बैंक
सहकारी ग्राम्य विकास बैंक

कमेटी में ये अधिकारी शामिल
प्रो. विकास श्रीवास्तव, एसोसिएट प्रोफेसर आईआईएम लखनऊ         अध्यक्ष
सीपी शुक्ला, सेवानिवृत्त अपर निबंधक सहकारिता लखनऊ         सदस्य
केके गुप्ता, सेवानिवृत्त मुख्य महाप्रबंधक नाबार्ड                 सदस्य
महाप्रबंधक/संयोजक बैंक ऑफ बड़ौदा, लखनऊ                 सदस्य
विशेष सचिव सहकारिता, लखनऊ                         सदस्य
अपर मुख्य सचिव संस्थागत वित्त द्वारा नामित विशेष सचिव            सदस्य
अपर आयुक्त एवं अपर निबंधक (बैंकिंग) सहकारिता लखनऊ          सदस्य
वित्त नियंत्रक सहकारिता लखनऊ                         सदस्य
सचिव/सीईओ, कार्यरत/सेवानिवृत्त जिला सहकारी बैंक             सदस्य
प्रबंध निदेशक यूपी कोऑपरेटिव बैंक                 सदस्य/सचिव        
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