प्रदेश सरकार सरकारी नियंत्रण में अलग-अलग नाम से संचालित सहकारी बैंकों के विलय पर विचार कर रही है। सहकारिता विभाग के नियंत्रण में केवल एक ही बैंक रखने का प्रस्ताव है। इस बारे में नीति बनाने के लिए भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) लखनऊ के एसोसिएट प्रोफेसर विकास श्रीवास्तव के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी से दो महीने में सहकारिता विभाग को अपनी संस्तुतियां देने को कहा गया है।
सहकारिता विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यह कमेटी बैंकों केविलय की विस्तृत समीक्षा कर खूबियों, कमजोरियों, अवसरों और चुनौतियों को सामने लाएगी। मानव संसाधन क्षेत्र में नीतियां, संस्थाओं व सहकारी बैंकों में तकनीकी विकास के वर्तमान स्तर की समीक्षा करते हुए तकनीकी व्यवस्था, पैक्स समितियों के व्यवसाय व प्रस्तावित बैंक के स्वरूप के संबंध में विस्तृत अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगी। आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता कमेटी की रिपोर्ट का परीक्षण कर शासन को अपनी संस्तुतियां उपलब्ध कराएंगे। शासन कैबिनेट के जरिये इस पर अंतिम निर्णय करेगा।