विहिप प्रवक्ता ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए हिंदू समाज न्याय की प्रतीक्षा करता आ रहा है। सत्र न्यायालय से चला मामला अब सुप्रीम कोर्ट में भी तारीख पर तारीख मिलने के कारण प्रभावित हो रहा है।
पूर्व में कांग्रेस नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील कपिल सिब्बल ने जिस प्रकार से इस मामले में अवरोध उत्पन्न किया और आज वकील राजीव धवन द्वारा इस मामले में जो उंगली उठाई गई उससे पता चलता है कि कांग्रेस की मंशा क्या है? कांग्रेस नहीं चाहती कि मामले का शीघ्र समाधान हो। इसलिए सुन्नी वक्फ बोर्ड के कंधे पर सवार होकर लगातार रामलला को पीड़ित कर रही है।
उन्होंने कहा कि हिन्दुओं की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट भगवान श्रीराम की पीड़ा को समझे और साथ ही हिंदू समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए नियमित सुनवाई का मार्ग प्रशस्त करे।
विहिप प्रवक्ता ने कहा, प्रयागराज में आयोजित कुंभ के दौरान 31 जनवरी और 1 फरवरी को साधु संतों की 'धर्म संसद' में सुप्रीम कोर्ट में चल रही न्यायिक प्रक्रियाओं के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए वक्तव्य पर विचार करते हुए ठोस निर्णय लेंगे।
इसके अलावा सनकादिक आश्रम के महंत व संत समिति के अध्यक्ष कन्हैया दास ने कहा कि श्री राम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण होकर रहेगा। यह मुस्लिम पक्षकार भलीभांति समझ रहे हैं। इसलिए वह न्यायालय में किसी न किसी बहाने अवरोध डालने का काम कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट से इस देश के नागरिकों को बहुत आशाएं हैं लेकिन बार-बार तारीख बढ़ने से निराशा हो रही है।