विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने मार्च में देश भर में मनाए जाने वाले राम महोत्सवों के सहारे लोगों को राम मंदिर का इतिहास लोगों को याद दिलाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए प्रदेश भर में जिला बैठकें शुरू हो गई हैं। जिनमें उस जिले में महोत्सव के स्थान और उनमें शामिल होने वाले मुख्य अतिथि का नाम तय करने के साथ लोगों को आंदोलन का इतिहास बताने का खाका खींचा जा रहा है।
विहिप ने प्रदेश में लगभग 40-50 हजार स्थानों पर और देश में तकरीबन तीन लाख जगहों पर यह महोत्सव मनाने की योजना बनाई है। राम महोत्सव चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (भारतीय नववर्ष) 25 मार्च से 9 अप्रैल तक आयोजित होंगे।
विहिप की कोशिश है कि अयोध्या मामले में सर्वोच्च न्यायालय से मंदिर के पक्ष में फैसला आने के बाद भी इस मुद्दे पर लोगों में हिंदुत्व की चेतना जगाए रखी जाए। जिससे हिंदुत्व को देश की राजनीति में मुख्य धुरी बनाने वाले इस मुद्दे को लोगों के बीच याद रखा जा सके।
इसीलिए विहिप ने फैसला आने के बाद न सिर्फ राम महोत्सवों के सहारे उन गांवों व स्थानों के लोगों से संपर्क व संवाद को ताजा करने की योजना बनाई जहां से 90 के दशक में शिलापूजन कार्यक्रम के दौरान पूजन होकर शिलाएं अयोध्या लाई गई थीं बल्कि कारसेवकों की स्मृतियों को सहेजने का फैसला कर उनके गांव व परिवार से अपने रिश्तों को ताजा करने की योजना बनाई है। सभी जगह अयोध्या के मंदिर आंदोलन के 1528 से 2019 तक न्यायालय के फैसले का संघर्षों का इतिहास भी बताया जाएगा। इसके लिए मुख्य बिंदु भी समझाए जा रहे हैं।
इस तरह हो रही तैयारी
विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार और राष्ट्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे की देखरेख में आयोजन की तैयारियां चल रही हैं। किसी स्तर पर चूक न हो इसके लिए विहिप के प्रमुख पदाधिकारियों को अलग-अलग क्षेत्रों में प्रभारी बनाकर उनकी देखरेख में जिलों की बैठकें कराई जा रही हैं। प्रदेश उपाध्यक्ष चंपत राय ने गोरखपुर प्रांत की जिम्मेदारी संभाल रखी है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी विहिप के क्षेत्रीय संगठन मंत्री अंबरीष कुमार को सौंपी गई है। इसी तरह अन्य क्षेत्रों में भी वरिष्ठ पदाधिकारियों की देखरेख में बैठकें चल रही हैं। जिनमें राम महोत्सव के स्थान, उनके आयोजक और अतिथियों के नाम तय करने के साथ उनके यहां से अयोध्या आंदोलन में हिस्सा लेने वाले कार्यसेवकों की सूचियां तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।
विहिप के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा कहते हैं कि मंदिर आंदोलन में बलिदान देने वाले या संघर्ष करने वाले कारसेवक हिंदू समाज के धर्मयोद्धा है। जो जीवित हैं उन्हें ब्लॉक स्तर पर बड़ा कार्यक्रम करके अभिनंदन किया जाएगा। पर, जो दिवंगत हो चुके हैं अथवा जिनकी मृत्यु आंदोलन के दौरान पुलिस की गोलियों से हुई उनके परिजनों को सम्मानित कर उनके परिवार के योगदान को याद किया जाएगा।