प्रदेश में नए डीजीपी के रूप में कार्यभार संभालने वाले हितेश चंद्र अवस्थी के लिए आने वाले दिन चुनौतियों से भरे रहेंगे। जिम्मेदारी संभालते ही जहां एक ओर डिफेंस एक्सपो का चैलेंज है, वहीं विभिन्न जिलों में सीएए के खिलाफ कई दिनों से चल रहे विरोध-प्रदर्शन भी चुनौती हैं। हालांकि अवस्थी अभी कार्यवाहक डीजीपी बनाए गए हैं, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि उन्हें ही पूर्णकालिक डीजीपी की भी जिम्मेदारी मिलेगी। उसके बाद वह अपनी नई टीम भी बनाएंगे।
अवस्थी के सामने सबसे बड़ी चुनौती फिलहाल राजधानी में 5 फरवरी से होने वाले डिफेंस एक्सपो की है। इसमें दुनिया भर के देशों से रक्षा क्षेत्र के दिग्गज आ रहे हैं। लखनऊ में पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साथ जल, थल और वायु सेना के अध्यक्ष मौजूद रहेंगे। चार दिन चलने वाले डिफेंस एक्सपो के लिए आशियाना में एक अस्थायी शहर बसाया गया है। इस पूरे कार्यक्रम में सुरक्षा की दृष्टि से नोडल अधिकारी के रूप में लखनऊ जोन के एडीजी एसएन साबत को जिम्मेदारी दी गई है।
सीएए के विरोध से निपटना भी चुनौती
लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, सहारनपुर, बरेली और अलीगढ़ में सीएए के विरोध में महिलाओं का प्रदर्शन कई दिनों से चल रहा है। यह प्रदर्शन होली तक खिंचा तो पुलिस के लिए चुनौती बढ़ भी सकती है।
पंचायत चुनाव सबसे बड़ी चुनौती
जून से दिसंबर के बीच ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के चुनाव होने हैं। पूर्व के वर्षों में यह चुनाव रक्तरंजित होते रहे हैं। ऐसे में पुलिस के लिए शांतिपूर्ण चुनाव कराना चुनौती रहेगी।
अफसरों की तैनाती
दर्जन भर आईपीएस अफसरों को प्रमोशन केबाद तैनाती का इंतजार है। इनमें चार जिलों में एसएसपी व एसपी प्रमोशन पाकर डीआईजी होंगे लेकिन उन्हें तैनाती नहीं मिली है। आईजी कानून-व्यवस्था का पद प्रवीण कुमार के आईजी मेरठ बनने के बाद से खाली है। तीन एडीजी भी प्रमोशन पा चुके हैं, उन्हें भी नई जिम्मेदारी दी जानी है। पीएसी, अपराध और सुरक्षा मुख्यालय में एक के स्थान पर दो-दो एडीजी कार्यरत हैं। यहां भी अफसरों को नई तैनाती का इंतजार है। एसटीएफ में एसएसपी का पद लगभग एक महीने से खाली है। माना जा रहा है कि नए डीजीपी पूर्णकालिक डीजीपी का आदेश होने के बाद ही अफसरों में जिम्मदारियां बांटेंगे और अपनी नई टीम बनाएंगे।