रायबरेली। जिला विकास समन्वय एवं अनुश्रवण समिति (दिशा) की बैठक में सांसद राहुल गांधी के सामने जिले में धूल खा रहे वेंटिलेटरों का मामला उठने के बाद अफसरों की नींद टूट गई है। पोल खुलने के बाद जिला अस्पताल में लगे वेंटिलेटरों की सुविधा मरीजों को देने की कवायद शुरू हो गई है। दो डॉक्टरों को ट्रेनिंग के लिए लखनऊ भेजा गया है। फरवरी 2025 में ट्रेनिंग पूरी होने के बाद वेंटिलेटर की सुविधा मरीजों को मिलनी शुरू हो जाएगी।
पीएम केयर फंड और कॉर्पोरेशन से जिले को 24 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे। इसमें 10 वेंटिलेटरों को जिला अस्पताल के पीडियाट्रिक आईसीयू में लगाया गया है। 10 वेंटिलेटरों को गोदाम में और तीन वेंटिलेटरों को इमरजेंसी वार्ड में रखवाया गया है। स्टाफ न होने के कारण मरीजों को वेंटिलेटर की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
बीती पांच नवंबर को दिशा की बैठक में पूर्व मंत्री डॉ. मनोज पांडेय ने मामले को उठाया था। सीएमओ डॉ. नवीनचंद्रा ने वाहवाही लूटने के लिए वेंटिलेटरों के संचालित होने की जानकारी बैठक में दी थी। बाद में जांच कराई गई तो पता चला कि सभी वेंटिलेटर धूल खा रहे हैं, उन्हें चलाने के लिए स्टाफ की व्यवस्था अब तक नहीं कराई गई है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी मरीजों को वेंटिलेटरों की सुविधा न मिलने के बाद उन्हें एम्स या अन्य बड़े अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जा रहा है।
डीएम और सीडीओ का दबाव बढ़ने के बाद अब लापरवाह अफसरों ने वेंटिलेटरों को संचालित कराने की कवायद शुरू कर दी है। प्रशिक्षण के लिए डॉ. शीवेंद्र मिश्रा और डॉ. आशा कुमारी आर्या को लखनऊ भेजा गया है। तीन माह के प्रशिक्षण के बाद चिकित्सकों के वापस आने पर मरीजों को इस सुविधा का लाभ मिलने की उम्मीद है। सीएमओ डॉ. नवीन चंद्रा का कहना है कि दो डॉक्टरों को प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है। तीन माह में चिकित्सकों को वेंटिलेटर चलाने का प्रशिक्षण मिलेगा।
सीएमएस ने स्टाफ के लिए शासन को लिखा है पत्र
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. प्रदीप अग्रवाल ने वेंटिलेटरों को संचालित कराने के लिए स्टाफ की व्यवस्था के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा है। कहा है कि वेंटिलेटर दुरुस्त हैं, लेकिन स्टाफ न होने के कारण मरीजों को सुविधा नहीं दी जा पा रही है। जल्द ही स्टाफ की व्यवस्था कराई जाए, जिससे गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर की सुविधा दी जा सके। सीएमएस का कहना है कि इस संबंध में उच्चाधिकारियों से बात की जा रही है। जल्द ही स्टाफ मिलने की उम्मीद है।