फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lucknow News: वेंटिलेटर हैं, मरीजों को मिल नहीं रहे... राजधानी के सरकारी अस्पतालों में आधे से अधिक वेंटिलेटर बंद

विज्ञापन
प्रतीकात्मक।
विज्ञापन
लखनऊ। राजधानी के सरकारी अस्पतालों में आधे से अधिक वेंटिलेटर बंद पड़े हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों और मैनपावर की कमी के कारण गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर मिलने में परेशानी हो रही है। लोकबंधु और बलरामपुर जैसे प्रमुख अस्पतालों में भी वेंटिलेटरों का पूरी क्षमता से संचालन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर के लिए भटकना पड़ रहा है।
विज्ञापन

लोकबंधु अस्पताल में 40 वेंटिलेटर हैं, लेकिन इनमें से केवल 10 पर ही मरीजों की भर्ती हो रही है। अस्पताल में डेढ़ साल पहले हुए अग्निकांड के बाद आईसीयू का निर्माण पूरा न होने से बाकी वेंटिलेटर बंद हैं। इसी तरह, बलरामपुर अस्पताल में 60 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं, लेकिन केवल 28 का संचालन हो रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के चलते यहां भी पूरी क्षमता से वेंटिलेटर यूनिट संचालित नहीं हो पा रही है।
ठाकुरगंज अस्पताल में दो और रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल में पांच वेंटिलेटर हैं। इन अस्पतालों में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों और संसाधनों की कमी के कारण मरीजों की नियमित भर्ती नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन

पीजीआई समेत अन्य चिकित्सा संस्थानों में करीब 500 वेंटिलेटर हैं। यहां पूरे प्रदेश के साथ बिहार से भी मरीज आते हैं, जिससे वेंटिलेटरों पर दबाव अधिक रहता है। गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर मिलने में अड़चन आती है।
इलाज का भारी खर्च
सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर पर भर्ती मरीजों को मुफ्त इलाज मिलता है। हालांकि, केजीएमयू, पीजीआई और लोहिया संस्थान में प्रतिदिन 10 से 20 हजार रुपये तक खर्च आता है। निजी अस्पतालों में यह खर्च एक से डेढ़ लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंच जाता है। ऐसे में गरीब मरीजों के लिए सरकारी अस्पताल ही सहारा हैं।
Iसभी अस्पतालों में वेंटिलेटर क्रियाशील हैं। सभी अस्पतालों के डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ का प्रशिक्षण भी पूरा हो चुका है। इसके बाद भी वेंटिलेटर बंद हैं तो अस्पतालों से जवाब तलब किया जाएगा।I
I- डॉ. पवन कुमार अरुण, स्वास्थ्य महानिदेशकI
Iअस्पताल में अभी 28 वेंटिलेटर पर मरीजों की भर्ती हो रही है। जिले के किसी भी अस्पताल में इतने बेड पर मरीजों की भर्ती नहीं हो रही है। डॉक्टर और मैनपावर मिलने पर पूरी क्षमता के साथ वेंटिलेटर यूनिट का संचालन होगा।I
I- डॉ. बीकेएस चौहान, निदेशक, बलरामपुर अस्पतालI
Iअस्पताल में अभी 10 बेड पर मरीजों की भर्ती हो रही है। स्वाइन फ्लू के लिए आईसीयू के पांच नए बेड बढ़ाए गए हैं। अग्निकांड के बाद अभी तक जला हुआ भवन नहीं मिला है। भवन मिलने के बाद बंद वेंटिलेटर भी शुरू किए जाएंगे।I
विज्ञापन

I- डॉ. विवेक गुप्ता, निदेशक, लोकबंधु अस्पतालI
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें