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Lucknow News: सड़क पर दौड़ते-दौड़ते दम तोड़ रहे वाहन

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केस एक : सीतापुर रोड निवासी आकाश ने एक हफ्ते पहले वजीरगंज थाना क्षेत्र के एक पंप पर पेट्रोल भराया। पेट्रोल भराने के बाद उनकी स्कूटी चलते-चलते बंद होने लगी। कंपनी ने स्कूटी की वायरिंग, वॉल्व, फिल्टर बदला तक ठीक हुई। कंपनी ने कहा कि खराब पेट्रोल से स्कूटी में खराबी आई।
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केस दो
: आशियाना निवासी शिवम की बाइेक 15 दिन से रुक-रुक कर चल रही है। साथ ही गाड़ी आवाज भी करने लगी है। शिवम कैंट क्षेत्र में पेट्रोल भरवाते हैं। उन्होंने बाइक मैकेनिक को दिखाया तो वह बीमारी को पकड़ ही नहीं पा रहा है।
केस तीन : जानकीपुरम जनकल्याण महासमिति के महासचिव विनय कृष्ण पांडेय की 10 साल पुरानी एक्शेंट कार पिछले 10 दिन से चलने में असहज लग रही है। महज 60 हजार किमी चली कार में पेट्रोल भराने के लिए कई पंप बदल चुके हैं लेकिन दिक्कत बढ़ती जा रही है।
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लखनऊ। राजधानी में एक माह से वाहन सवार परेशान और कारीगर हैरान हैं। इसकी वजह वाहनों का चलते-चलते दम तोड़ना हैं। यह चंद उदाहरण इसकी गवाही दे रहे हैं। मगर, ऐसे वाहनों की तादाद हजारों में है। कारीगरों की मानें तो रोजाना करीब 4000 से 4500 गाड़ियां इसी तरह चलते-चलते सड़क पर रुक जा रही हैं, जिसको लोग घसीटकर मकैनिकों के पास लेकर पहुंच रहे हैं।
राजाजीपुरम के आरके श्रीवास्तव का आरोप कि मिलावटी पेट्राल के चलते कार, बाइक व स्कूटी की दुर्दशा हो रही है। पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 20 फीसदी होने पर कोई असर न पड़ने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसकी जांच भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते जनता को पूरी कीमत चुकाने पर भी खराब गुणवत्ता का पेट्रोल भरवाने के लिए बेबस होना पड़ रहा है।
कारीगर बोले -कुछ तो गड़बड़ है
पेट्रोल मेें कुछ तो गड़बड़ है। जो फिल्टर 6 से 8 माह में खराब होता था वह महीने भर में ही खराब हो जा रहा है। खासतौर पर स्कूटी सवार महिलाओं को बहुत दिक्कत हो रही है। फिल्टर को पेचकस व रिंच के सहारे सड़क पर बदला भी नहीं जा सकता। उसे वर्कशॉप लाना ही पड़ता है।
राजकुमार रावत, इंदिरानगर
कार्बन ज्यादा बन रहा
एथेनॉल मिक्स पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों में कार्बन पहले के मुकाबले ज्यादा बन रहा है। इंजन भी गरम हो रहा है जिससे, गाड़ी चलते-चलते बंद हो रही है। इससे माइलेज भी कम हुआ है और गाड़ियों को स्टार्ट करने में भी परेशानी हो रही है।
सलमान, चारबाग
कंपनियों की ओर से मिलावट की आशंका
कारीगरों के मुताबिक एथेनॉल ब्लेंडिंग से गाड़ियों के माइलेज में तो कमी आई है। हालांकि इंजन पर इसका कितना असर है इसे स्पष्ट रूप से बता पाना मुश्किल है। कारीगरों ने चिंता जताई कि तेल कंपनियों की ओर से पेट्रोल से मिलावट भी गाड़ियों के बंद होने का कारण हो सकती है।
IकोटI
Iपेट्रोल में एथेनॉल कई साल पहले से मिलाया जा रहा है। पहले इसकी शुरुआत डेढ़ प्रतिशत से हुई थी। उसके बाद पांच प्रतिशत, फिर 15 प्रतिशत और कई माह से इसे 20 प्रतिशत कर दिया गया है। वाहन के इंजन पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ेगा। माइलेज कम जरूर होगा। - आलोक त्रिवेदी, महासचिव लखनऊ पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशनI
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