हर्ष, उमंग और उल्लास का पर्व वसंत उत्सव मंगलवार को शहर में धूमधाम से
मनाया गया।
कहीं पीत वस्त्रों में सज-धजकर लोगों ने मां सरस्वती की
पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद लिया तो कहीं बच्चों को पाटी पर जीवन का पहला
अक्षर लिखना सिखाया।
सुबह से ही खिली चटख धूप ने भी ऋतुराज वसंत के आगमन का
जोरदार स्वागत किया और पूरी फिजा को वसंती बना दिया। उधर, युवकों की टोली
ने जगह-जगह होलिका के लिए शहर के विभिन्न मोहल्लों और चौराहों पर अरंड की
डालें बैठाई।
सुबह से खिली चटख धूप ने
चारों ओर वसंत का उल्लास भर दिया। प्रकृति के इस बदले कलेवर के बीच लोगों
ने घरों और मंदिरों में सुबह पूजन के बाद आम के बौर देखे।
घरों में
बुजुर्गों ने बच्चों को पहली बार कलम और दवात पकड़वाई। मंदिरों में पूजन कर
लोगों ने मां वाग्देवी को पीले फूलों से सजाकर सफेद मिष्ठान के साथ आम के
बौर और गेहूं की बालियां चढ़ाई।
वहीं, आसपास के ग्रामीण इलाकों में किसानों
ने खेत में तैयार हो रही नई फसल की पूजा के बाद गुड़ का भोग लगाकर अन्न
देवता से आशीष लिया।
घरों में पूजन के बाद पीले और केसरिया रंग के पकवान
बनाए गए। कई जगह तहरी भोज भी हुए। होलिका दहन के लिए युवाओं ने शहर के
चौराहे पर अरंड की डाल बैठाई और उपले डाले।