भाजपा सांसद वरुण गांधी ने कहा कि सांसदों की औसत सम्पत्ति 15 करोड़ रुपये है फिर भी वेतन-भत्ते में वृद्घि की मांग उठाई गई। इससे मुझे शर्म आती है। मैंने तत्कालीन लोकसभा स्पीकर को लिखकर दिया कि मैं बढ़ी हुई सैलरी नहीं लूंगा। वर्ष 2009 से मैं अपनी तनख्वाह उन किसानों के परिवारों को दे रहा हूं, जिन्होंने कर्ज के कारण आत्महत्या कर ली थी।
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ये बातें शुक्रवार को राजधानी के संगीत नाटक अकादमी के सभागार में भाजपा सांसद वरुण गांधी ने कही। इस दौरान उन्होंने सामाजिक-आर्थिक विषमताओं के आंकड़े बताते हुए इन्हें दूर करने पर जोर दिया। गांधी मीडिया नेस्ट सोसायटी और सिटीजन फोरम के यूथ कॉनक्लेव में आइडियाज फॉर न्यू इंडिया विषय पर बोल रहे थे।
वरुण ने कहा, केरल के केटी जोसफ बेटी की पढ़ाई के लिए तीन लाख रुपये के कर्ज को चुकाने के लिए घर का सारा सामान बेचकर सिर्फ ढाई लाख जुटा पाते हैं। अंतत: 50 हजार रुपये का इंतजाम नहीं होने पर आत्महत्या कर लेते हैं।
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वहीं, एक उदाहरण विजय माल्या का भी है, जो 9,400 करोड़ रुपये ऋण चुकाने के बजाय लंदन भाग गए। इस मामले में पीलीभीत के किसान मनमोहन को गिरफ्तार किया गया, जिसके खाते में महज 12 सौ रुपये थे। बाद में पता चलता है कि वह माल्या के बैंक लोन का गारंटर है। इसे कभी न्यायपूर्ण नहीं कहा जा सकता है।
एक व्यक्ति की आय लगभग 33 रुपये प्रतिदिन
भाजपा सांसद वरुण गांधी
- फोटो : amar ujala
उन्होंने कहा, तीन चौथाई हिंदुस्तानी हर महीने पांच हजार रुपये कमाते हैं। इस आमदनी से उनका पांच लोगों का परिवार पलता है। इस तरह एक व्यक्ति की आय लगभग 33 रुपये रुपये प्रतिदिन हुआ। उधर, शहरों में 48 करोड़ कामकाजी लोगों में महज 55 फीसदी की दैनिक आमदनी 134 रुपये है।
भाजपा सांसद ने कहा, इस गरीबी को खत्म किया जा सकता है। उन्होंने बोलिविया का उदाहरण देते हुए कहा, वहां गरीबी उन्मूलन के लिए नेशनल फोरम बनाया गया।
800 संगठनों और 4,000 जमीनी नेताओं के साथ विचार-विमर्श करके योजना बनाई। इसके क्रियान्वयन से वहां वर्ष 2001 से अब तक 40 फीसदी गरीबी दूर हो गई है। हमारे देश में भी ऐसा हो सकता है, जरूरत लोगों की आवाज सुनने की है।
'राजनीति में प्रतिभाएं खोजने के लिए बनाया जा सकता है मंत्रालय'
- फोटो : amar ujala
भाजपा सांसद ने कहा, जार्डन में राजनीति के लिए प्रतिभाशाली युवाओं की खोज करने के लिए एक विशेष मंत्रालय है। इस मंत्रालय ने तहसील स्तर तक जाकर राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले युवाओं की खोज की। तीन साल में वहां 28 सांसद इन्हीं युवाओं में से बने। ऐसा प्रयोग यहां में किया जा सकता है।
लखनऊ के दुर्गेश व सीतापुर की नव्या सीखिए
वरुण ने कहा, लखनऊ के इंजीनियरिंग स्टूडेंट दुर्गेश नंदन रिक्शा व ऑटो चालकों को उनका मालिक बनाने का बीड़ा उठाया है। इसके लिए उसने एक कंपनी बनाई। अभी तक वह 1,800 लोगों को रिक्शा व ऑटो का मालिक बना चुका हैं।
उधर, सीतापुर की नव्या वेल्यू एवरी आइडिया नाम से वेबसाइट चलाती हैं। उन्होंने गरीब महिला दस्तकारों को तीन हफ्ते की ट्रेनिंग देकर उनकी आमदनी को 1,500 रुपये प्रतिदिन तक पहुंचा दिया है।
देश में शिक्षकों की कमी का समाधान बताते हुए वरुण ने कहा, यूजी और पीजी स्टूडेंट्स के लिए 200 घंटे पढ़ाना अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए। इससे देश में शिक्षकों की कमी तुरंत पूरी हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि आरटीई पर हर साल एक लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। हर एक किमी पर एक स्कूल भवन बनाए जा रहे हैं। मगर, बच्चों को प्राइमरी पास करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए आठ किमी पैदल जाना पड़ता है। नतीजतन 30 फीसदी बच्चे ही इंटर तक पढ़ाई पूरी कर पाते हैं।
लिहाजा गांव-गांव में भवन बनवाने के बजाय पंचायत स्तर पर बड़ा स्कूल बनाया जाए। साथ ही आस-पास के 8-10 गांवों के लिए मुफ्त ट्रांसपोर्ट की सुविधा हो तो सब बच्चे स्कूल आना शुरू कर देंगे।