राजधानी लखनऊ में डर, संकोच और झिझक के साथ शुरू हुआ 12 से 14 साल के बच्चों का कोरोना टीकाकरण अभियान अब उत्साह में बदलता जा रहा है। कोवॉक्सिन और कोविशील्ड वैक्सीन की खुराक लेने के बाद कई लोगों ने हल्के बुखार की शिकायत की थी। वहीं दूसरी ओर बच्चों को लगाई जा रही कॉरबीवैक्स वैक्सीन में यह समस्या भी देखने को नहीं मिली है। इसके साथ ही कॉरबीवैक्स की दोनों डोज के बीच का अंतर सिर्फ 28 दिन का ही है, इसलिए शुरुआती दिनों में परीक्षा चलने की वजह से सुस्त रहा टीकाकरण अभियान अब तेजी पकड़ने लगा है।
लखनऊ में बुजुर्ग, युवा और किशारों के बाद 16 मार्च से 12 से 14 साल आयु वर्ग बच्चों को कोविड-19 से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान शुरू हो चुका है। राजधानी में एक लाख 94 हजार 424 बच्चों को कोविड टीका लगाया जाना है। टीकाकरण को लेकर बच्चे पहले से ही उत्साहित थे, पर इसी बीच ज्यादातर स्कूलों में परीक्षा भी हो रही थी। इसको देखते हुए अभिभावकों में थोड़ी झिझक जरूर थी। अभिभावकों के अनुसार कोविड-19 के कोवॉक्सिन और कोवीशील्ड वैक्सीन में ज्यादातर लोगों ने हल्के बुखार की शिकायत की थी, इसलिए परीक्षा के समय बच्चों को टीका लगवाने में डर लग रहा था।
5712 को अब तक लगी वैक्सीन
लखनऊ में पहले दिन 12 से 14 साल आयु वर्ग के बच्चों के टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने काफी तैयारी की थी। इसकी वजह से पहले दिन 1474 बच्चों को कॉरबीवैक्स वैक्सीन की डोज दी गई थी। पहले दिन बड़े अस्पतालों में इसकी शुरुआत की गई थी। इसके बाद से अभियान में थोड़ी सुस्ती आ गई। यही वजह रही कि अब तक राजधानी में 5712 को ही वैक्सीन लग पाई है। उम्मीद की जा रही है आने वाले दिनों में अभियान और तेजी पकड़ेगा।
स्कूलों में लगेगा कैंप
राजधानी में बोर्ड परीक्षा की शुुरुआत हो गई है। इससे पहले अन्य कक्षाओं की परीक्षा चल रही थी, इसलिए अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चलने वाले कैंप में बच्चों की उपस्थिति कम थी। इसको देखते हुए अब स्कूलों में ही कैंप लगाने की व्यवस्था की जा रही है। मौके पर ही बच्चों का पोर्टल पर पंजीकरण किया जाएगा। इसके बाद अभियान में और तेजी आना तय है। - डॉ. एमके सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
पहले थी झिझक, लेकिन अब उत्साह
बच्चों को टीका लगवाने में डर नहीं था, लेकिन थोड़ी झिझक जरूर थी। इसकी वजह खुद को वैक्सीन लगवाने के बाद आने वाला बुखार था। झिझकते हुए बच्चों ने टीके की डोज लगवाई थी, लेकिन उनको बुखार नहीं आया। इसलिए बाकी अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने बच्चों को कोरोना से बचाने के लिए वैक्सीन जरूर लगवाएं। - शिव किशोर द्विवेदी, अभिभावक
जरूर लगवाएं कोरोना टीका
डरने की जरूरत नहीं है। कोरोना टीका पूरी तरह सुरक्षित है। कई चरण के ट्रायल के बाद इनको तैयार किया गया है। बच्चों के लिए पूरी से सुरक्षित पाये जाने पर ही इसे मंजूरी मिली है, इसलिए सभी अभिभावक अपने बच्चों को कोरोना टीका जरूर लगवाएं। इससे हम इस महामारी के खिलाफ सशक्त लड़ाई लड़ पाएंगे। - डॉ. सलमान, बाल रोग विशेषज्ञ डफरिन अस्पताल
मैं बेहद उत्साहित हूं। सिविल अस्पताल में पहली डोज ली। टीके को लेकर किसी तरह का डर व भ्रम बच्चे न पालें। छोटे भाई को भी वैक्सीन लगवाने लाया था, मगर उम्र कम होने की वजह से वैक्सीन नहीं लग पाई। - अन्वेश बाजपेई, छात्र सेंट फ्रासिंस
लोकबंधु अस्पताल में मैंने पहली डोज ली हैं, पहले थोड़ी झिझक थी। यही वजह है हफ्ते भर बाद टीका लगवाया। टीका पूरी तरह से सुरक्षित है। अब साथी छात्रों को भी टीका लगवाने के लिए प्रेरित करूंगा। - प्रखर, छात्र, नौवीं डीपीएस स्कूल
मैंने खुद वैक्सीन लगवाने के लिए परिजनों से जिद की थी। अब मैं अपनी क्लास में पढ़ने वाले सभी साथियों को भी वैक्सीन की पहली डोज लगवाने के लिए कहूंगा। - आरव, छठवीं क्लास, सीएमएस गोमतीनगर