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देश में प्रमुख आर्थिक ताकत बनेगा यूपी, वापस लौटे 25 लाख श्रमिक प्रदेश के विकास में बनेंगे भागीदार

Wed, 27 May 2020 04:20 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
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योगी सरकार जिन 25 लाख कामगारों व श्रमिकों को प्रदेश में वापस लायी है, उनके रोजगार की पुख्ता व्यवस्था करने के भी प्रयास कर रही है। इस मानव श्रम को पूंजी में बदलने की दिशा में काम शुरू हो चुका है, ताकि वे प्रदेश के विकास में भागीदार बन सकें। प्रदेश सरकार ने श्रमिकों व कामगारों की स्किल मैपिंग की पहली सूची तैयार करवा ली है। भविष्य में भी यह डाटा काफी उपयोगी साबित होगा।

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यूपी देश का सबसे बड़ा बाजार है। सबसे ज्यादा जनसंख्या व सबसे ज्यादा जनशक्ति वाला प्रदेश भी है। ऐसे में स्किल मैपिंग कराकर उन्हें हुनर के अनुरूप रोजगार दिया जाएगा तो निश्चित ही प्रदेश 10 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को पार कर जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दिशा में कार्य करते हुए रविवार को प्रदेश में श्रमिकों के लिए कमीशन बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद टीम 11 की बैठक में बन रही कामगार/श्रमिक (सेवायोजन एवं रोजगार) कल्याण आयोग के गठन और कामगारों व श्रमिकों को प्रदेश में ही रोजगार मुहैया कराने की योजना तैयार हो रही है।

अब तक 14.75 लाख कामगारों की स्किल मैपिंग का काम पूरा कर लिया है और बाकी बचे श्रमिकों की भी स्किल मैपिंग जारी है। जिससे श्रमिक और कामगारों की स्किल के अनुसार श्रेणीकृत डाटा पूल बन सके। इस काम के लिए अन्य राज्यों से लौटे श्रमिकों और मजदूरों का पूरा ब्यौरा तैयार कराया जा रहा है।
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मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अपने श्रमिकों व कामगारों को उत्तर प्रदेश में ही रोजगार की व्यवस्था हो। वह चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश न केवल आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था में परिवर्तित हो, बल्कि देश के अंदर प्रमुख आर्थिक ताकत भी बन सके। उदाहरण के तौर पर वियतनाम से आने वाली अगरबत्ती उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं बन सकती है।

उत्तर प्रदेश के उत्पाद का हो निर्यात

फर्नीचर, रेडिमेड गारमेंट इंडस्ट्री, परफ्यूम, कृषि उत्पाद, फूड पैकेजिंग, गाय संबंधी उत्पाद, फूल से जुड़े उत्पाद, खाद और फर्टिलाइजर का निर्यात उत्तर प्रदेश से क्यों नहीं हो सकता है। जाहिर है कि उत्तर प्रदेश से निर्यात की संभावना भी ज्यादा है।

प्रदेश सरकार इसी आधार पर श्रमिकों व कामगारों की स्किल मैपिंग, डाटा पूलिंग, इंटर्नशिप और योग्यतानुसार प्लसमेंट कराएगी। स्किल मैपिंग में सबसे बड़ी 1,51,492 की तादाद रियल स्टेट डवलपर और वर्कर्स की है। फर्नीचर और फिटिंग के 26989 टेक्नीशियन, 26041 बिल्डिंग डेकोरेटर हैं। होम केयरटेकर्स की संख्या 12633 और 10,000 ड्राइवर हैं।

आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स के 4680 टेक्नीशियन व होम एप्लांयसेज के 5884 टेक्नीशियन हैं। आटोमोबाइल टेक्नीशियन की संख्या 1558 है। पैरामेडिकल एवं फार्मास्युटिकल के 596 वर्कर्स, 12103 ड्रेस मेकर, 1274 ब्यूटिशियन, 1284 हैंडिक्राफ्ट एंड कारपेट्स मेकर, 3364 सिक्योरिटी गार्ड्स के अलावा भी दूसरे कौशल में निपुण कई कामगारों की मैपिंग हुई है।
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ट्रेनिंग भत्ता भी मिलेगा

सरकार सभी श्रमिकों व कामगारों का डाटा बैंक बना रही है, ताकि आने वाले वक्त में अगर कोई विपदा देश में आती है तो सरकार को इसकी जानकारी हो कि उत्तर प्रदेश के कितने मजदूर किस राज्य में हैं। प्रदेश सरकार वहीं पर उन्हें सामाजिक सुरक्षा एवं अन्य सहयोग उपलब्ध करा सके।

इसके अलावा जो मजदूर आज तक दूसरे राज्यों की अर्थव्यवस्था को आधार देने एवं समृद्ध बनाने का कार्य कर रहे थे। वहीं, अब प्रदेश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने का कार्य करेंगे। इसलिए मुख्यमंत्री हर कामगार व श्रमिक को बीमा की सुरक्षा मिलेगी।

श्रमिकों और कामगारों को रोजगार के साथ-साथ आवासीय व्यवस्था में भी सरकार सहयोग करेगी। यूपी सरकार स्किल मैपिंग के बाद इनकी ट्रेनिंग व इंटर्नशिप कराएगी। इस दौरान उन्हें ट्रेनिंग भत्ता दिया जाएगा।
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