फर्नीचर, रेडिमेड गारमेंट इंडस्ट्री, परफ्यूम, कृषि उत्पाद, फूड पैकेजिंग, गाय संबंधी उत्पाद, फूल से जुड़े उत्पाद, खाद और फर्टिलाइजर का निर्यात उत्तर प्रदेश से क्यों नहीं हो सकता है। जाहिर है कि उत्तर प्रदेश से निर्यात की संभावना भी ज्यादा है।
प्रदेश सरकार इसी आधार पर श्रमिकों व कामगारों की स्किल मैपिंग, डाटा पूलिंग, इंटर्नशिप और योग्यतानुसार प्लसमेंट कराएगी। स्किल मैपिंग में सबसे बड़ी 1,51,492 की तादाद रियल स्टेट डवलपर और वर्कर्स की है। फर्नीचर और फिटिंग के 26989 टेक्नीशियन, 26041 बिल्डिंग डेकोरेटर हैं। होम केयरटेकर्स की संख्या 12633 और 10,000 ड्राइवर हैं।
आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स के 4680 टेक्नीशियन व होम एप्लांयसेज के 5884 टेक्नीशियन हैं। आटोमोबाइल टेक्नीशियन की संख्या 1558 है। पैरामेडिकल एवं फार्मास्युटिकल के 596 वर्कर्स, 12103 ड्रेस मेकर, 1274 ब्यूटिशियन, 1284 हैंडिक्राफ्ट एंड कारपेट्स मेकर, 3364 सिक्योरिटी गार्ड्स के अलावा भी दूसरे कौशल में निपुण कई कामगारों की मैपिंग हुई है।
सरकार सभी श्रमिकों व कामगारों का डाटा बैंक बना रही है, ताकि आने वाले वक्त में अगर कोई विपदा देश में आती है तो सरकार को इसकी जानकारी हो कि उत्तर प्रदेश के कितने मजदूर किस राज्य में हैं। प्रदेश सरकार वहीं पर उन्हें सामाजिक सुरक्षा एवं अन्य सहयोग उपलब्ध करा सके।
इसके अलावा जो मजदूर आज तक दूसरे राज्यों की अर्थव्यवस्था को आधार देने एवं समृद्ध बनाने का कार्य कर रहे थे। वहीं, अब प्रदेश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने का कार्य करेंगे। इसलिए मुख्यमंत्री हर कामगार व श्रमिक को बीमा की सुरक्षा मिलेगी।
श्रमिकों और कामगारों को रोजगार के साथ-साथ आवासीय व्यवस्था में भी सरकार सहयोग करेगी। यूपी सरकार स्किल मैपिंग के बाद इनकी ट्रेनिंग व इंटर्नशिप कराएगी। इस दौरान उन्हें ट्रेनिंग भत्ता दिया जाएगा।