उत्तर प्रदेश एक ऐसा राज्य है, जहां पुलिस से ज्यादा हथियार आम जनता के पास पाए जाते हैं। राजनेता हों या धार्मिक गुरु, टीचर हों या किसान यहां तक कि स्टूडेंट्स...तक कट्टे-तमंचे रखे मिल जाएंगे।
मंगलवार को लखनऊ में स्पेशल स्क्वॉयड और क्राइम ब्रांच की टीम के हत्थे एक ऐसा शख्स चढ़ गया, जिसके पास दर्जनों अत्याधुनिक बंदूकें, 15 लाख रुपये कैश और 15 लाख की ही विदेशी बाइक मिली। इस शख्स का नाम है तारिक जो शहर के जॉपलिंग रोड पर रहता है।
पुलिस ने आरोपी के घर पर छापा मारा गया। 16 रायफलें, तीन बुलेटप्रूफ जैकेट, तलवारें, खुखरी और रुपये गिनने की मशीन इसके अलावा कई ऐसे हथियार जिनकी पहचान करना पुलिस के लिए भी मुश्किल पड़ गया!
पुलिस का कहना है कि तारिक समुद्री मार्ग से असलहों के अलग-अलग पार्ट्स मंगाता, फिर असेंबल कर स्वरूप बदल देता था। इससे असलहे और भी घातक हो जाते थे। ये पहला मामला नहीं यूपी में पहले भी कई बार ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। आइए, नजर डालते हैं कुछ पुराने मामलों पर और जानते हैं कैसे चल रहा है यूपी में घर-घर हथियारों का खेल...
यूपी है हथियारों का गढ़
खबरों के मुताबिक बीते दिनों फर्रूखाबाद के एसएचओ राजकुमार सिंह के मर्डर में इस्तेमाल की गई बंदूक भी अवैध रूप से हथियार रखने वाले डीलर से 3500 रुपये में खरीदी गई थी। फर्रूखाबाद में पहले भी कई बार अवैध हथियार मिलने की खबरे आई हैं।
वहीं पुलिस का कहना है कि मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, गौतमबुद्ध नगर, बागपत, सहारनपुर और मुज्जफरनगर से हर साल करीब 10,000 हजार लोग अवैध रूप से हथियार बनाने और इनकी सप्लाई करने में गिरफ्तार किए जाते हैं।
वेस्टर्न यूपी के कुछ जिले अवैध रूप से हथियार बनाते ही नहीं बल्कि हरियाणा, दिल्ली जैसे दूसरे राज्यों सहित दूसरे देशों को भारी मात्रा में हथियार सप्लाई करते हैं। इन देशों में नेपाल बंग्लादेश शामिल हैं।
मुज्जफरनगर में सामने आए कई मामले
मुज्जफरनगर में 2014 की शुरुआत में पहले कोतवाली पुलिस ने अवैध रूप से चल रही तमंचा फैक्ट्री का भांडाफोड़ किया था।
कुछ ही दिनों बाद वहां नई मंडी पुलिस ने चेकिंग के दौरान बस अड्डे से दो लोगों को तमंचों सहित गिरफ्तार किया। पुलिस ने इनके पास से एक बोरी में छिपाकर रखे दर्जनों बने और अधबने तमंचे बरामद किए।
इतना ही नहीं पुलिस ने इनके पास से हथियार बनाने वाले उपकरण भी बरामद किए। पुलिस ने बताया था कि आरोपी फुरकान कुछ ही दिन पहले जेल से छूटकर आया है। फुरकान इससे पहले भी अवैध रूप से हथियार रखने के मामले में जेल जा चुका है।
मार्च 2014 में पुलिस ने मुज्जफरनगर के गांव सुजडू के एक मकान में अवैध हथियारों की फैक्ट्री पकड़ी। पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि लोकसभा चुनाव में इन हथियारों की खरीद-फरोख्त बढ़ जाती है।
डिमांड को देखते हुए भारी मात्रा में हथियार बनाए जाते हैं। दरअसल मुज्जफरनगर में 10 अप्रैल को चुनाव होना था। पकड़े गए आरोपी वसीम, इस्लाम, इसरार और अब्दूल कादिर का ये खुलासा कई सवाल पैदा करता है।
जाहिर सी बात है अगर भारी मात्रा में हथियार बन रहे हैं तो इन्हें खरीदा भी जा रहा है। ये फैक्ट कई सवाल खड़े करता है।
कैसे बनते हैं ये हथियार
जानकार बताते हैं कि बंदूक का हर हिस्सा अलग-अलग बनता है और बाद में इन्हें एक साथ जोड़ा जाता है। कच्चे माल के रूप में पानी वाले पाइप और स्टीयरिंग का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ गैंग कारतूसों में पटाखों वाले गनपाउडर और डिटर्जेंट वाले केमिकल का इस्तेमाल करते हैं।
रिपोर्ट्स जो चौंका देंगी...
2014 की शुरुआत में अमृतसर के अटारी रेलवे स्टेशन पर दो पुलिस ने महिलाओं सहित छह लोगों को 11 तमंचों के साथ गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि ये समझौता एक्सप्रेस से पाकिस्तान से लौट रहे थे। उन्हें गिरफ्तार करने वाले कस्टम आफीसर्स ने बताया कि ये छह लोग उत्तर प्रदेश के मुज्जफरनगर से हैं।
वहीं मुज्जफरनगर में कालेज स्टूडेंट्स के एक ग्रुप ने मुज्जफरनगर-मेरठ हाईवे पर एक परिवार को बंदूक की नोक पर लूट लिया था।
करीब 3 करोड़ की आबादी वाले मुज्जफरनगर में 15,456 लोगों के पास बंदूक के लाइसेंस हैं, जबकि पुलिस रिकार्ड्स के मुताबिक 16 डीलर हैं।
दिल्ली पुलिस की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक बीते कुछ दिनों में दिल्ली में हुई ज्यादातर हत्याएं अवैध रूप से बने हथियारों से हुई हैं। ये हथियार बिहार के मुंगेर और यूपी के मुज्जफरनगर से तस्करी कर लाए गए थे।