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हवाई जहाज के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने पर जिंदा रहने के लिए जरूरी सामान नहीं ढूंढ सके योगी के मंत्री!

Mon, 16 Sep 2019 06:32 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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आईआईएम लखनऊ में राज्यमंत्री स्वाती सिंह, उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, सिद्घार्थनाथ सिंह व अन्य। - फोटो : amar ujala
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पिछली बार बाढ़ से घिरी गुफा में फंसे लोगों को निकालने में मंत्री भटक गए थे तो इस बार रेगिस्तान में हवाई जहाज के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के कारण जिंदगी बचाने वाले सबसे जरूरी सामान की तलाश में। ऊपर से मुसीबत यह कि सामान तलाशने की वरीयता तय करने के लिए हर एक के पास सिर्फ 10 मिनट का ही वक्त था। इसी 10 मिनट में ही जिंदगी बचाने के लिए सबसे जरूरी सामान की तलाश कर लेनी थी।

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जो हवाई जहाज दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, उसमें मंत्रियों के साथ इस बार अधिकारी भी थे। वे अधिकारी जो मंत्रियों को रोज के कामकाज में सलाह देते हैं, उनकी मदद करते हैं। पर, आईआईएम लखनऊ में प्रबंधन और प्रशासन का गुर सीखने दूसरी बार कक्षा में मंत्री उलझे तो ये अधिकारी भी उनकी सही तरीके से मदद नहीं कर पाए। किसी को ऐसे मौके पर आहार पुस्तिका जरूरी लगी तो किसी को पानी।

मंत्रियों के सामने यह रखी गई समस्या
मई का महीना, सुबह के 10 बजे हैं। दो इंजनों वाला हल्का विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें बैठे ये मंत्री व अधिकारी तपते हुए रेगिस्तान में आ गिरे। पायलट और उसके साथी का शरीर पूरी तरह जल चुका है लेकिन मंत्री व अधिकारी सुरक्षित बच जाते हैं। दुखद यह था कि दुर्घटना से पहले पायलट ने विमान की स्थिति के बारे में कुछ नहीं बताया था। सिर्फ यह संकेत दिया था कि विमान दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक खनन कैंप से 115 किमी. की दूरी पर है।
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इस जानकारी के अनुसार, हवाई जहाज अपने तय हवाई मार्ग से 100 किमी. दूर भटक चुका है। दुर्घटना की जगह काफी बंजर थी, जहां बैरल और सागुआरो कैक्टस (जंगली झाड़ियां) ही थीं। पिछली मौसम रिपोर्ट के अनुसार जहाज में सवार मंत्रियों व अधिकारियों को सिर्फ यह मालूम था कि वहां का तापमान लगभग 55 डिग्री सेंटीग्रेड होगा। मंत्री व अधिकारी सामान्य व हल्के कपड़े पहने थे। आधी बांह की शर्ट-पैंट, मोजे और कैजुअल जूते। इनके पास एक-एक रुमाल था। सभी को मिलाकर सिर्फ 15 रुपये 25 पैसे फुटकर और 300 रुपये के नोट, सिगरेट का एक पैकेट और एक बॉलपॉइंट पेन ही था।

करना क्या था, दुर्घटनाग्रस्त हवाई जहाज में सिर्फ 15 वस्तुएं बची थीं

कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी पूरे दिन मौजूद रहे। - फोटो : amar ujala
दुर्घटनाग्रस्त हवाई जहाज में सिर्फ 15 वस्तुएं बची थीं। इनमें 4 बैटरी वाली टॉर्च, चाकू, दुर्घटनाग्रस्त क्षेत्र का वर्गीकृत हवाई नक्शा, प्लास्टिक का रेनकोट (बड़ा साइज), चुंबकीय कंपास, बांधने की पट्टी, कारतूस भरी पिस्तौल क्षमता 0.45, पैराशूट (लाल और सफेद), नमक टैबलेट की बोतल, प्रति व्यक्ति 1 लीटर पानी, ‘आहार योग्य रेगिस्तानी जीव’ किताब, प्रति व्यक्ति एक धूप का चश्मा, 2 लीटर शराब 180 प्रूफ (क्षमता), प्रति व्यक्ति एक ओवरकोट और एक दैनिक उपयोग का दर्पण।

मंत्रियों और अधिकारियों को जिंदा रहने के लिए इन 15 वस्तुओं के महत्व को क्रम से लिखना था। यह भी संकेत किया गया था कि एक नंबर पर लिखी वस्तु सबसे अधिक महत्व की और 15वे नंबर लिखी वस्तु सबसे कम महत्व की होगी।

इन वस्तुओं की उपयोगिता बताते हुए तय करनी थी वरीयता

आईआईएम लखनऊ में मौजूद मंत्री व अफसर। - फोटो : amar ujala
दर्पण : दर्पण बहुत महत्वपूर्ण है। यह रेगिस्तान में लोगों की उपस्थिति दूर तक लोगों को बताता है। सूरज की रोशनी में एक दर्पण 50 से 70 लाख मोमबत्तियों की रोशनी कर सकता है। इसकी रोशनी से बचाव दल जल्दी आपके पास पहुंच सकता है।

ओवरकोट : रेगिस्तान में फंसने पर सबसे जरूरी शरीर के पानी को बचाना होता है। पानी की कमी का मुख्य कारण पसीना निकलना है। ओवरकोट की मदद से गर्मी और गर्म हवाओं से शरीर को बचाया जा सकता है ताकि पसीना कम से कम गिरे। रेगिस्तानी गर्मी और लू की स्थिति में ओवरकोट सामान्यत: समस्या लगता है लेकिन ऐसी स्थिति में बचाव का यह सर्वोत्तम साधन है।

प्रति व्यक्ति एक लीटर पानी : दर्पण और ओवरकोट से रेगिस्तान में शायद तीन दिन जिंदगी बचाई जा सकती है। एक लीटर पानी जीवन को तो नहीं बढ़ा सकता लेकिन शरीर में पानी की कमी रोकने में मददगार हो सकता है। पर, एक बार पानी की कमी शुरू हो गई तो मात्र एक लीटर पानी कुछ खास मदद नहीं कर पाएगा। पानी को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देना जिंदा रहने में कोई खास मदद नहीं कर पाएगा।

ये चीजें भी हो सकती हैं मददगार

- फोटो : amar ujala
टॉर्च (4 बैटरी वाली) : रात में सिग्नल के लिए टॉर्च भरोसेमंद और तेज साधन है। टॉर्च और दर्पण होने पर 24 घंटे अपनी स्थिति बचाव दल तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। टॉर्च की उपयोगिता सिर्फ रात में ही, नहीं दिन में भी है। सूरज की किरणों का परावर्तन करके लेंस के सहयोग से सिग्नलिंग डिवाइस भी तैयार की जा सकती है। साथ ही लेंस और टॉर्च की मदद से आग भी जलाई जा सकती है। इसका बैटरी रखने वाला हिस्सा पानी रखने के काम भी आ सकता है।

पैराशूट (लाल और सफेद) : पैराशूट टेंट और सिग्नल डिवाइस के रूप में काम कर सकता है। सगुआरो कैक्टस एक तंबू पोल के रूप में काम कर सकता है। पैराशूट को उसकी डोरियों के सहारे इस पोल पर लगाकर तंबू बनाया जा सकता है। पैराशूट को दोहरा या तिहरा मोड़कर बचाव शेड में धूप के वक्त काफी अंधेरा किया जा सकता है।

चाकू : पहली 5 वस्तुओं की तरह इस क्रम में चाकू उतना जरूरी नहीं है। रेगिस्तान में रहने के लिए जरूरी शेल्टर या शेड बनाने और कठोर कैक्टस को पानी के लिए काटने में चाकू उपयोगी हो सकता है। कई प्रकार के उपयोग होने से चाकू इस्तेमाल योग्य अन्य वस्तुओं की सूची में अपना स्थान बखूबी बना लेता है।

प्लास्टिक रेनकोट : रेगिस्तान में पानी की समस्या से निपटने के लिए एक गड्ढा बनाकर और उस पर मूत्र से भीगी बालू और कैक्टस के टुकड़े रख दें। तापमान में बदलाव के साथ बालू और कैक्टस से पानी रिसेगा और गड्ढे में रेनकोट में इकट्ठा हो जाएगा। इससे एक लीटर पानी रोज एकत्र किया जा सकता है। पर, इस प्रक्रिया से एक लीटर पानी एकत्र करने में शरीर का दो लीटर पानी खर्च हो जाएगा।

कारतूस भरी पिस्तौल और धूप का चश्मा भी है महत्वपूर्ण

- फोटो : amar ujala
कारतूस भरी पिस्तौल : रेगिस्तान और तपती धूप में दूसरे दिन शरीर की क्षमता प्रभावित होगी। पानी की कमी से चलने में सक्षम नहीं रहेंगे। उस स्थिति में पिस्तौल बचाव और शोर के रूप में काम आ सकती है।

लगातार तीन फायर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपदा में फंसे होने का संकेत माने जाते हैं। पर, इसका उपयोग खतरनाक भी है। पानी की कमी से अधीरता, गुस्सा और तर्कहीनता बढ़ेगी तो पिस्तौल घातक हो सकती है। शिकार भी कर सकते हैं, लेकिन रेगिस्तान में फंसने की स्थिति में जीव का शिकार कर मांस खाने से शरीर में पानी की कमी और बढ़ सकती है।

धूप चश्मा : तेज रेगिस्तानी धूप फोटोथैल्मिया और सोलर रेटिनस जैसी बीमारी से अंधेपन का खतरा पैदा करती है।

बांधने की पट्टी : पानी की कमी से खून गाढ़ा हो जाता है। ऐसी स्थिति में खून बहने की समस्या उतनी खतरनाक नहीं हो सकती जब तक नस नहीं कटे। इसका उपयाोग सिर और शरीर को ढंकने में भी किया जा सकता है ताकि पानी की कमी और तेज धूप से बचाव किया जा सके।
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चुंबकीय कंपास और दो लीटर शराब भी है जरूरी

- फोटो : amar ujala
चुंबकीय कंपास : कंपास को चमकाकर बचाव के संकेत देने के अलावा बहुत उपयोग नहीं है। पर, पानी की कमी होने की स्थिति में कंपास पास होना खतरनाक हो सकता है। ऐसे भ्रम की स्थिति में मार्गदर्शन के लिए कंपास देखना किसी की राह भटकने का कारण बन सकता है।

वर्गीकृत नक्शा : शौचालय पेपर या आग जलाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका उपयोग सिर और आंख को ढंकने में किया जा सकता है। पर, यह खतरनाक भी हो सकता है। कंपास की तरह भटका भी सकता है।

‘आहार योग्य रेगिस्तानी जीव’ किताब : बंजर रेगिस्तान में आपके समूह के सामने पानी की समस्या है, भूख की नहीं। साथ ही रेगिस्तानी जीव रेत की ओट में रहते हैं। यह किताब अन्य उपयोगी जानकारी दे सकती है लेकिन पानी की कमी को और खतरनाक कर सकती है।

दो लीटर शराब : शराब पीने से कोई मरता है तो उसकी मुख्य वजह पानी की कमी है। शराब शरीर से पानी सोख लेता है। ऐसा अनुमान है कि शराब का प्रति एक औंस शरीर में दो-तीन औंस पानी का नुकसान करता है।
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