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यूपी कैबिनेट का फैसला, अब मुस्लिमों सहित सभी के लिए विवाह पंजीकरण जरूरी

Wed, 02 Aug 2017 10:17 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
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योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट ने मंगलवार को बहुप्रतीक्षित अनिवार्य विवाह पंजीकरण नियमावली को अपनी मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के बाद अब प्रदेश में सभी के लिए विवाह पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसमें मुस्लिम सहित किसी भी वर्ग को कोई छूट नहीं दी गई है।
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मात्र 10 रुपये के शुल्क में विवाह पंजीकरण हो जाएगा। पंजीकरण न कराने वालों को सरकारी सेवाओं का लाभ नहीं मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सिर्फ यूपी व नागालैंड में ही विवाह पंजीकरण अनिवार्य नहीं किया गया था।

शासनादेश जारी होते ही हो जाएगी जरूरी
जिस दिन से शासनादेश जारी होगा उस‌ दिन से विवाह पंजीकरण अनिवार्य हो जाएगा। जो पहले से शादी-शुदा है, उनके लिए पंजीकरण की अनिवार्यता नहीं रहेगी। लेकिन नियमावली जारी होने के बाद जो विवाह होंगे उनका पंजीकरण जरूरी होगा।
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खनन पट्टों का नवीनीकरण नहीं

- फोटो : amar ujala
यूपी में खनन पट्टों का नवीनीकरण नहीं होगा। विकास और निर्माण कार्यों से जुड़े पीडब्ल्यूडी, यूपीडा सहित अन्य सरकारी विभाग भी बालू रेत और पत्थर की खदान आवंटित करा सकेंगे। खनन में भ्रष्टाचार रोकने व पारदर्शिता लाने के लिए कैबिनेट ने नई खनिज नियमावली को मंजूरी दे दी।

अब बालू का खनन पट्टा 3 साल के बजाय 5 साल के लिए मिलेगा। सभी उप खनिजों के खनन पट्टे ई टेंडर या ई ऑक्शन से ही आवंटित किए जाएंगे। ब्लैक लिस्टेड फर्म को न तो खनन पट्टा मिलेगा न ही उन्हें ई-ऑक्शन और ई-टेंडर में शामिल होने दिया जाएगा।

उद्योगों को डीजल, प्राकृतिक गैस पर जारी रहेगी छूट
प्रदेश कैबिनेट ने जीएसटी लागू होने के बाद भी उद्योगों को डीजल व प्राकृतिक गैस पर वैट के रूप में पूर्व से मिल रही छूट जारी रखने की मंजूरी दे दी है। मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यह छूट इंडस्ट्री के तौर पर दी जाती है।
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निचली अदालतों में अब आधे घंटे अधिक सुनवाई

- फोटो : amar ujala
मुकदमों के जल्द निपटारे के लिए कैबिनेट ने दो प्रस्तावों को मंजूरी दी। पहला, अधीनस्थ न्यायालयों में आधे घंटे ज्यादा काम होगा। अभी सुबह 10.30 बजे से शाम चार बजे तक काम होगा है। इसे बढ़ाकर 4.30 बजे तक कर दिया है।

दूसरा यह कि पहले जरूरत पड़ने पर राजपत्रित अवकाश के दिनों में ही मुकदमों की सुनवाई होती थी। अब न्यायालयों के घोषित अवकाश में भी सुनवाई हो सकेगी।
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