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यूपी कैबिनेट का बड़ा फैसला, मथुरा के धार्मिक क्षेत्रों में नहीं बिकेगी शराब

Wed, 06 Jun 2018 09:43 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
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राज्य सरकार ने मथुरा के बरसाना, गोकुल, गोवर्धन, नंदगांव, राधाकुंड व बल्देव में शराब बंदी लागू कर दी है। कैबिनेट की मंगलवार को हुई बैठक में इन तीर्थस्थलों को मद्यनिषेध क्षेत्र घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इन तीर्थ स्थलों की 32 शराब की दुकानों को अब अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाएगा।

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कैबिनेट के फैसले के अनुसार वृंदावन क्षेत्र और बरसाना तीर्थस्थलों की पौराणिक व धार्मिक महत्ता को देखते हुए नगर पालिका वृंदावन व नगर पंचायत बरसाना के अधिसूचित क्षेत्र को धर्मार्थ कार्य विभाग ने 27 अक्तूबर 2017 को पवित्र तीर्थस्थल घोषित किया था।

इसी प्रकार नगर पंचायत गोवर्धन, राधाकुंड, नंदगांव, गोकुल व बल्देव के अधिसूचित क्षेत्रों को भी धर्मार्थ कार्य विभाग ने 22 मार्च 2018 को पवित्र तीर्थस्थल घोषित किया है। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि वृंदावन नगर पालिका क्षेत्र को पहले से ही मद्यनिषेध क्षेत्र घोषित किया गया है, इसलिए वहां अब कोई शराब की दुकान नहीं रहेगी।
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बरसाना स्थित देशी-विदेशी शराब व बीयर की दुकानें नगर पंचायत क्षेत्र के बाहर स्थानांतरित की गई हैं। इन तीर्थस्थलों में स्थित 32 शराब की दुकानों से होने वाली 11,10,60,188 रुपये के आबकारी राजस्व क्षति को कम करने के लिए इन्हें दूसरे क्षेत्रों में स्थानांतरित किया गया है।

मथुरा के छह स्थानों में शराबबंदी सहित कैबिनेट में कुल 17 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। आगे देखें...

बिजली चोरी रोकने के लिए अलग-अलग जिलों में खुलेंगे थाने

कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते ऊर्जा मंत्री व प्रदेश सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा। - फोटो : amar ujala
यूपी सरकार ने बिजली चोरी रोकने के लिए 75 एंटी पावर थेफ्ट पुलिस थाने खोलने का फैसला किया है। प्रदेश कैबिनेट ने सभी जिलों में एक-एक थाना खोलने के ऊर्जा विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। गुजरात, मध्य प्रदेश व राजस्थान में यह व्यवस्था पहले से लागू है।

राज्य सरकार के प्रवक्ता व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि बिजली चोरी रोकने के लिए पावर कॉरपोरेशन की सतर्कता इकाई के तहत वर्तमान में 33 प्रवर्तन दल कार्यरत हैं। इसके अलावा 55 अतिरिक्त प्रवर्तन दलों की स्वीकृति दी जा चुकी है। जिला पुलिस की व्यस्तता और भारतीय विद्युत अधिनियम-2003 के तकनीकी ज्ञान न होने से बिजली चोरी से जुड़े अपराधों की विवेचना गुणात्मक तरीके से नहीं हो पा रही है।

इससे उम्मीद के हिसाब से न्यायोचित परिणाम भी नहीं मिल पाते हैं। ऐसे में बिजली चोरी रोकने के लिए पांच डिस्काम के तहत सभी 75 जिलों में एक-एक एंटी पावर थेफ्ट पुलिस थाना स्थापित किए जाने को मंजूरी दी गई है। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि इससे बिजली चोरी करने वाले हतोत्साहित होंगे और ईमानदार उपभोक्ताओं को प्रोत्साहन मिलेगा।

हर थाने में होगी 28 लोगों की नियुक्ति

- फोटो : amar ujala
75 नए थानों की स्थापना से 2157 लोगों को नई नौकरी मिलेगी। प्रत्येक थाने में 28 लोगों की नियुक्ति की जाएगी। इसका पूरा खर्च पावर कॉरपोरेशन उठाएगा। सरकार पर कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आएगा। प्रत्येक थाने पर एक इंस्पेक्टर, 5 एसआई, 11 हेड कांस्टेबल, 9 कांस्टेबल और दो चतुर्थ श्रेणी कर्मी होंगे। हालांकि इन थानों के पुलिस कर्मी पुलिस विभाग का ही हिस्सा होंगे।

ये होंगे फायदे
- बिजली चोरी से जुड़े मुकदमे दर्ज करने की व्यावहारिक कठिनाई दूर होगी।
- दर्ज अपराध की विवेचना और पैरवी ठीक से होगी।
- बिजली चोरी रुकेगी और शमन शुल्क के रूप में राजस्व में वृद्धि होगी।
- लाइन लॉस में कमी होगी जिससे पावर फार आल के लक्ष्य को समय से पाया जा सकेगा।

पूर्वांचल एक्सप्रेस वे की बिड रद्द, 45 दिन में नई बिड प्रक्रिया पूरी करने की योजना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली प्रदेश कैबिनेट को मंगलवार को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे बनाने के लिए निर्माण एजेंसियों के चयन के लिए आमंत्रित बिड निरस्त कर दी। इसके पहले सपा शासनकाल में आमंत्रित बिड निरस्त की गई थी। कैबिनेट ने निर्माण एजेंसियों के चयन के लिए नए सिरे से बिड आमंत्रित करने को भी मंजूरी दी है। 45 दिन में नई बिड प्रक्रिया पूरी करने की योजना है।

प्रमुख सचिव सूचना एवं सीईओ यूपीडा अवनीश कुमार अवस्थी ने कैबिनेट की बैठक के बाद बताया कि  पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का निर्माण ईपीसी पद्धति पर किया जाना है। इस एक्सप्रेस वे पर कुल 23,349 करोड़ का खर्च आना है। इसमें सिविल कार्य पर टैक्स छोड़कर 11800 करोड़ आएगा।

अवस्थी ने बताया कि आठ पैकेज में एक्सप्रेस वे का निर्माण होना है। प्रचलित बिड प्रक्रिया में 10.97 प्रतिशत अधिक दर आई है। सरकार को उम्मीद है कि नए सिरे से बिड आमंत्रित करने पर यह दर और घट सकती है। इसके लिए कैबिनेट ने नए सिरे से बिड आमंत्रित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। अब तकनीकी व वित्तीय बिड की प्रक्रिया एक साथ चलेगी। इसे सिंगल स्टेज टू इनवलप (आरएफक्यू -कम-आरएफपी) प्रक्रिया कहा जाता है। इसके अंतर्गत बिड प्रक्रिया पूरी होने में 45 दिन ही लगेगा। आठों पैकेज के लिए नए सिरे से कांट्रैक्टर का चयन किया जाएगा।

अवस्थी ने बताया कि लोक निर्माण विभाग के माध्यम से रेट का आकलन कराया गया है। सरकार नई बिड प्रक्रिया राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के पैटर्न पर शुरू करेगी। लखनऊ से गाजीपुर के बीच बनने वाला यह एक्सप्रेस वे 10 जिलों को जोड़ेगा और सुल्तानपुर के पास एक एअर स्ट्रिप भी बनाई जाएगी।

जेवर एयरपोर्ट निर्माण के लिए होगी ग्लोबल बिडिंग

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
गौतमबुद्धनगर के जेवर में बनने वाले इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के निर्माण के लिए विकासकर्ता का चयन ग्लोबल बिडिंग के माध्यम से होगा। नागरिक  उड्डयन विभाग के इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। इससे जेवर एयरपोर्ट का काम जल्द शुरू होने की उम्मीद है।

जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने के राज्य सरकार के प्रस्ताव पर केन्द्र सरकार ने पिछले साल 6 जुलाई को ही साइट क्लियरेंस और बीते 9 मई को सैद्धांतिक सहमति दे दी है। पर्यावरण से संबंधित अनुमति के लिए राज्य सरकार ने 20 अप्रैल को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय में आवेदन कर दिया है। इसी कड़ी में 29 मई को पर्यावरण मंत्रालय के ‘एक्सपर्ट अप्रेजल कमिटी’ (ईएसी) के समक्ष प्रजेंटेशन भी चुका है।

राज्य सरकार द्वारा अब एयरपोर्ट का काम शुरू कराने के लिए एक ‘ज्वाइंट वेंचर कंपनी’ के गठन के लिए प्रदेश सरकार, नोएडा व ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरणों के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया जा चुका है। इस परियोजना पर करीब 4000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें से नागरिक उड्डयन विभाग 1500 करोड़, नोएडा अथॉरिटी 1500 करोड़ और ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी 5-5 सौ करोड़ रुपये खर्च करेंगे।

मगहर में स्थापित होगी कबीर दास अकादमी

- फोटो : amar ujala
संतकबीरनगर जिले में कबीर दास के समाधि स्थल मगहर में कबीर दास अकादमी की स्थापना की जाएगी। इसके निर्माण के लिए उप्र. आवास एवं विकास परिषद को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। योगी कैबिनेट ने मंगलवार को मगहर में कबीर दास अकादमी की स्थापना से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। राज्य सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक कार्यदायी संस्था ने अकादमी के निर्माण के लिए 24,93,75,000 रुपये का इस्टीमेट तैयार किया था।

प्रायोजना रचना मूल्यांकन प्रभाग द्वारा इसका परीक्षण करने के बाद परियोजना की लागत 23.59 करोड़ मानी गई है। प्रभाग ने सुझाव दिया था कि इस्टीमेट में प्रस्तावित योजना में मेटल फाल्स सीलिंग, वाल पैनलिंग, वुड ब्लाक फ्लोरिंग, सिंथेटिक कारपेट, एनोटोन सबटेक्स टेक्सर स्केयर टाइल्स व म्यूरल का प्रावधान किया गया है जो लोक निर्माण विभाग की निर्धारित विशिष्टियों से उच्च है। इसलिए इस पर कैबिनेट का अनुमोदन प्राप्त कर लिया जाए। कैबिनेट ने इन विशिष्टियों को मंजूरी दे दी है।

दुग्ध क्षेत्र में निवेश पर मिलेंगी कई रियायतें
प्रदेश में दुग्ध क्षेत्र में पूंजी निवेश बढ़ाने के लिए कैबिनेट ने उप्र. दुग्ध नीति-2018 के मसौदे को हरी झंडी दे दी। इससे जहां पूंजी निवेश बढ़ेगा, वहीं रोजगार के करीब 10 लाख अवसर पैदा होंगे। यह नीति अधिसूचना जारी होने के पांच वर्ष तक लागू रहेगी।

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि इस फैसले से उपभोक्ताओं को उचित दर पर दूध और उसके उत्पाद मिल सकेंगे। कुपोषण दूर करने में भी मदद मिलेगी। नीति में पूंजी निवेश अनुदान, ब्याज उपादान, गुणवत्ता मानकीकरण, प्रोत्साहन प्रावधान, बाजार विकास एवं ब्रांड प्रोत्साहन, पेटेंट व डिजाइन पंजीकरण के संबंध में मदद की भी व्यवस्था की गई है।

अनूपशहर, कायमगंज व घोसी में फिर शुरू होंगी डिस्टिलरी इकाइयां

- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश सरकार ने सहकारी चीनी मिल संघ की बंद पड़ी छह इकाइयों में से अनूपशहर, कायमगंज व घोसी की डिस्टिलरी इकाइयों को फिर शुरू करने का फैसला किया है। कैबिनेट की पिछली बैठक में ननौता, संपूर्णानगर और नानपारा चीनी मिलों की डिस्टिलरी इकाइयों को शुरू करने को मंजूरी दी गई थी।

चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सुरेश राणा ने बताया कि  सरकार ने बंद सभी छह इकाइयों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज संयत्र स्थापित कर फिर से शुरू करने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि अनूपशहर, कायमगंज व घोसी की इकाइयों में जीरो लिक्विड संयंत्र स्थापित करने में 79 करोड़ 29 लाख 52 हजार रुपये का खर्च आएगा।

शीरा निर्माण पर नियंत्रण को नियमावली में संशोधन
प्रदेश सरकार ने शीरा निर्माण पर और नियंत्रण लगाया है। इसके लिए कैबिनेट ने नियमावली में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। संशोधन के बाद शीरे की संग्रहण सीमा 50 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी कर दिया गया है। तय किया गया है कि शीरे का परिवहन अब जीपीएस युक्त लारियों से ही किया जाए।

सरकार ने शीरे के भंडारण, बिक्री व संचरण में पारदर्शिता लाने के लिए आधुनिक तकनीक का समावेश करते हुए नियमावली में संशोधन किया है। इसके तहत अब चीनी मिलों में उत्पादित शीरे का सभी ब्यौरा, नमूनों के परीक्षण परिणाम या किसी तरह की शिकायत को आबकारी विभाग के पोर्टल पर अपलोड करने का प्रस्ताव है।

नई व्यवस्था में आवंटित शीरे की उठान 45 दिनों में न होने पर प्रतिदिन पांच हजार रुपये के दंड का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा ई- ट्रांजिट परमिट के धोखाधड़ी व गलत प्रयोग पर भी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। प्रदेश से अन्य राज्यों के लिए शीरा निर्यात/परिवहन की अनुज्ञा के लिए शीरा नियंत्रक/आबकारी आयुक्त की अध्यक्षता में समिति बनेगी।

अडानी ग्रुप तैयार करेगा घाटमपुर से बिजली निकासी का ट्रांसमिशन नेटवर्क

कानपुर के घाटमपुर में स्थापित हो रही 1980 मेगावाट क्षमता की ताप विद्युत परियोजना से बिजली निकासी के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क तैयार करने का जिम्मा अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड को सौंपा गया है। अडानी समूह पीपीपी मॉडल पर नेटवर्क तैयार करेगा।

अडानी ग्रुप का चयन टैरिफ बेस्ड कंपटिटिव बिडिंग के माध्यम से किया गया है। विकासकर्ता के रूप में कैबिनेट ने अडानी समूह को मंजूरी दे दी। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि इसके टैरिफ का आगणन केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग के नियमों के अनुसार किया गया है। इस ट्रांसमिशन नेटवर्क के निर्माण से घाटमपुर परियोजना से पैदा होने वाली वेस्ट यूपी, आगरा तथा आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचाई जाएगी।

वाराणसी की पिंडरा तहसील के 10 राजस्व ग्राम सदर में शामिल
वाराणसी की पिंडरा तहसील के 10 राजस्व गांव सदर तहसील में शामिल किए जाएंगे। कैबिनेट ने इससे जु़ड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि इन गांवों की पिंडरा तहसली से दूरी 25 किमी से अधिक है जबकि तहसील सदर मुख्यालय 8 किमी से कम है। इससे लोगों को परेशानी होती थी। इस परिसीमन से तहसील पिंडरा में कुल ग्रामों की संख्या 432 के स्थान पर 422 व तहसील सदर में कुल राजस्व ग्राम 559 के स्थान पर 569 हो जाएंगे।

प्रदेश में शुरू होगा संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार

- फोटो : amar ujala
प्रदेश में संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना शुरू करने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके तहत 51 बुनकरों और डिजाइनर्स को हर साल पुरस्कृत किया जाएगा। ये पुरस्कार परिक्षेत्र और राज्य स्तर के होंगे।

सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि योजना का उद्देश्य हथकरघा बुनकरों में प्रतिस्पर्धा पैदा कर उन्हें उम्दा हथकरघा वस्त्र बनाने के लिए प्रेरित करना है। परिक्षेत्र स्तर पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार के तौर पर क्रमश: 20, 15 और 10 हजार रुपये के पुरस्कार दिए जाएंगे। होगी। इसमें कुल 39 बुनकरों को सम्मानित किया जाएगा।

राज्यस्तर के पुरस्कार चार श्रेणियों में कुल 12 बुनकरों को दिए जाएंगे। श्रेणी-1 में साड़ी, ब्रोकेड व ड्रेस मैटेरियल, श्रेणी-2 में सूती व वूलेन दरी, आसनी व दरेट, श्रेणी-3 में बेडशीट, वेड कवर व होम फर्निशिंग और श्रेणी-4 में स्टोल, स्कार्फ, गमछा व अन्य चीजों को शामिल किया गया है।

इसमें प्रथम पुरस्कार एक लाख रुपये, द्वितीय 50 हजार  और तृतीय पुरस्कार 25 हजार रुपये का होगा। इस तरह से परिक्षेत्र व राज्यस्तर पर 51 बुनकर सम्मनित होंगे। इस तरह बुनकरों को कुल नकद राशि 12.85 लाख रुपये देकर सम्मानित किया जाएगा।

पशु प्रजनन नीति-2018 मंजूर

- फोटो : amar ujala
प्रदेश में पशुओं की नस्ल सुधार के लिए कैबिनेट ने उप्र. पशु प्रजनन नीति-2018 को मंजूरी दे दी है। अब तक प्रदेश में लागू पशु प्रजनन नीति-2002 कारगर साबित नहीं हो पा रही थी। पाया गया कि एचएफ संकर प्रजाति में दुग्ध उत्पादन तो अधिक है, पर दूध में कम वसा और एसएनएफ होने  से दूध का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है।

इसे देखते हुए पशु प्रजनन नीति-2018 में विदेशी प्रजाति के रूप में जर्सी व जर्सी क्रॉस और पूर्व में प्रदेश में चिह्नित स्वदेशी गोवंश प्रजातियों-साहीवाल, हरियाणा, गंगातीरी और थारपरकर के अलावा गिर गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए अति हिमीकृत वीर्य की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाएगी। इससे पशुधन की नस्ल पीढ़ी दर पीढ़ी सुधरेगी।

प्रदेश में कूड़े से बिजली के साथ फ्यूल भी तैयार होगा
प्रदेश में कूड़े से बिजली के साथ ही ईंधन (फ्यूल) का भी उत्पादन किया जाएगा। जैविक व प्लास्टिक जनित कूड़े का उपयोग भी ईंधन तैयार करने में किया जाएगा। इसके लिए नगर विकास विभाग द्वारा बनाई गई ‘उप्र राज्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नीति’ को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब प्रतिदिन निकलने वाले कूड़े का उपयोग बिजली व ईंधन के उत्पादन में किया जाएगा।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नीति के तहत जैविक कूड़े से कंपोस्ट खाद बनाया जाएगा। इसका उपयोग कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में होगा। कंपोस्ट खाद तैयार करने का काम जोन व वार्ड स्तर पर किया जाएगा। नीति के मुताबिक कूड़ा कचरे की वजह से पर्यावरण को होने वाला नुकसान कम करने के लिए नगर निकायों को जैविक व ठोस कूड़े को उसी स्थान पर अलग-अलग करने की व्यवस्था करनी होगी, जहां से कूड़ा निकल रहा है। निकायों को ठोस कूड़ा निस्तारण के लिए ऐसे विकल्प भी तलाशने होंगे जिसके माध्यम से वायु प्रदूषण और ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सके।
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शराब बोतलों पर लेबल के लिए अनुमोदन फीस चार गुना बढ़ी

राज्य सरकार ने शराब की बोतलों पर लगने वाले लेबल की संख्या में कमी करते हुए इसकी अनुमोदन राशि को चार गुना बढ़ा दिया है। कैबिनेट के इस फैसले से भारत में बनी शराब जिसे देश व प्रदेश के बाहर भेजा जाता है, उस पर लेबल की वर्तमान फीस को 60 हजार से 2,50,000 रुपये, बीयर के लेबल की फीस 35 हजार से 1,50,000 व एसएबी के लेबल की फीस पांच हजार से बढ़ाकर 20,000 रुपये कर दी गई है।

मौजूदा समय प्रदेश में बेची जाने वाली विदेशी शराब की बोतलों पर चिपकाए जाने वाले लेबलों पर केवल राज्य, संघ राज्य क्षेत्र या देश का नाम मुद्रित करने की व्यवस्था है। सरकार ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के वर्तमान परिदृश्य में उद्योगों को बढ़ावा देने व प्रदेश के कारोबारियों को उत्पादन व निर्यात करने के लिए लेबल पर देश या प्रदेश का नाम न लिख कर सिर्फ ओवरसीज व अंतरप्रांतीय एक्सपोर्ट अंकित किया जाए। इससे जहां लेबलों की संख्या कम होगी, वहीं विदेश व्यापार में सुगमता आएगी। लेबलों की संख्या कम होने पर राजस्व में कमी आ सकती है। इसी नाते इसकी फीस राशि में वृद्धि की गई है।
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