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इस हॉस्पिटल में कैद है पांच करोड़ रुपये का 'मुर्दा'

Sat, 17 Aug 2013 11:40 AM IST
लखनऊ/अमित यादव
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किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के ट्रॉमा सेंटर में पांच करोड़ रुपये का मुर्दा (ह्यूमन सिमुलेटर) ताले में बंद पड़ा है।
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एमबीबीएस और पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे मेडिकोज के प्रशिक्षण के लिए करीब चार साल पहले इस ‘मुर्दे’ को जर्मनी से खरीदा गया था।

यही नहीं, एनेस्थीसिया विभाग की हेड सहित तीन फैकल्टी सदस्यों को दो सप्ताह के प्रशिक्षण के लिए जर्मनी भी भेजा गया था।

कुछ दिन इस पर प्रशिक्षण दिया गया, लेकिन बाद में इसे ट्रॉमा सेंटर के द्वितीय तल पर एक कमरे में बंद कर दिया गया। अब करोड़ों का ‘मुर्दा’ धूल खा रहा है और मेडिकोज प्रशिक्षण की सुविधा होने के बावजूद प्रैक्टिकल नहीं कर पा रहे हैं।
दी जानी थी ट्रेनिंग
केजीएमयू से एमबीबीएस और पीजी करने वाले मेडिकोज के प्रशिक्षण के लिए लगभग पांच करोड़ रुपये की कीमत का एक ह्यूमन सिमुलेटर खरीदा गया था। इसे मानव शरीर की तरह ही बनाया गया है।
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इसमें धड़कता दिल, फेफड़े, नाड़ी चलने की आवाज, सांस लेते समय सीना फूलता और पिचकता भी है। पूरी तरह से इस कम्प्यूटराइज्ड ह्यूमन सिमुलेटर की खासियत यह है कि बीमारियों जैसी परिस्थितियां पैदा कर इलाज का तरीका भी सिखाया जा सकता है।

जैसे हार्ट अटैक पड़ने पर कार्डियो पल्मोनरी रिसेसिटेशन (सीपीआर) देना या फिर डिफ्रेबिलेटर से बिजली के झटके देना, फेफड़ों में पानी भरने की स्थिति में ट्यूब डाल बाहर निकालना, नसों के रास्ते दवाएं या फिर ड्रिप चढ़ाना भी इस सिमुलेटर में संभव है।

है विभागीय लापरवाही
यहां तक कि पेट में होने वाले आंतरिक रक्तस्राव, पेशाब आदि रुक जाने की स्थिति में जननांग में कैथेटर कैसे डाला जाए, इसका भी प्रशिक्षण इस ह्यूमन सिमुलेटर पर दिया जा सकता है, लेकिन विभागीय लापरवाही से इस मशीन पर छात्रों को प्रशिक्षण दिया जाना पूरी तरह से बंद है।
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चकित करने वाली बात यह है कि प्रदेश में इस तरह का ह्यूमन सिमुलेटर सिर्फ केजीएमयू के एनेस्थीसिया विभाग के पास ही है। इस पर प्रशिक्षण देने के लिए विभागाध्यक्ष सहित तीन फैकल्टी सदस्य दो सप्ताह के लिए जर्मनी गए थे। वहां इसका प्रशिक्षण भी लिया था, लेकिन करोड़ों खर्च के बावजूद फायदा मेडिकोज को नहीं मिल रहा है।
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