लखनऊ। बच्चों की तस्करी करने वाला गिरोह बेहद गोपनीयता से काम करता था। खरीदार को हर प्रकार से संतुष्ट करने का प्रयास किया जाता था। अगर कोई खरीदार बच्चे के माता-पिता के बारे में जानकारी मांगता था तो उसे उनका आधार कार्ड भी देते थे। पूछताछ में गिरोह ने पुलिस को बताया है कि अधिकतर मामलाें में खरीदार बच्चे के माता-पिता से मिलने की इच्छा नहीं जताते थे।
एसीपी अलीगंज बृज नारायण सिंह का कहना है कि गिरफ्तार किए गए लोगों के बयान के आधार पर छानबीन की जा रही है। आरोपियों ने बताया कि खरीदार को संदेह होता था कि जिस बच्चे को वे खरीद रहे हैं वह चोरी का तो नहीं। इस शक को दूर करने के लिए कई बार वास्तविक माता-पिता का पहचान पत्र उन्हें दिया जाता था। हालांकि, इसे गाेपनीय रखने की हिदायत भी दी जाती थी।
पुलिस को दिल्ली की एक महिला के वीडियो मिले हैं, जिसके जरिये उसकी तलाश की जा रही है। बताया जा रहा है कि यूपी के अलावा दूसरे राज्यों में उसी महिला का नेटवर्क था। महिला के पकड़े जाने के बाद झारखंड और दिल्ली में बच्चों की तस्करी का राज सामने आएगा। एसीपी का कहना है कि आरोपियों को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया जाएगा। अब तक आरोपियों ने कितने बच्चों की तस्करी की है, इसकी जानकारी की जाएगी।
सरगना से आरोपियाें का आमना सामना कराएगी पुलिस
पुलिस गिरोह के सरगना गोंडा के गौरपुरवा कर्नलगंज निवासी विनोद सिंह का अन्य आरोपियों आरजू नगर मड़ियांव निवासी डॉ. अल्ताफ, सीतापुर के शीतलपुरवा हरगांव निवासी नीरज कुमार गौतम, न्यू आनंद नगर विकासनगर निवासी कुसुम देवी, सीतापुर के गलैहरा छावनी के पास अटरिया निवासी संतोष कुमारी और सरावा महिगवां निवासी शर्मा देवी से आमना सामना भी कराएगी। पुलिस काे आरोपियों की कॉल डिटेल से अहम जानकारी मिली है, जिसके माध्यम से कुछ संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है।
यह है मामला
मासूमों की तस्करी करने वाले गिरोह का मंगलवार को मड़ियांव पुलिस ने राजफाश किया था। गिरोह में शामिल तीन महिलाओं समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों के पास से एक नवजात बच्ची भी बरामद हुई थी। गिरोह पांच लाख में लड़का और तीन लाख में लड़की बेचता था। आरोपियों ने विकासनगर निवासी एक दंपती को दो लाख में एक बच्ची बेच दी थी। मामले में मड़ियांव थाने के दरोगा भूपेंद्र सिंह ने संतोष कुमारी और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।