लखनऊ। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को पत्र भेजा है। उन्होंने भारतीय सिविल रॉन्ग्स एवं क्षतिपूर्ति संहिता लाने का आग्रह किया है। इसका उद्देश्य लापरवाही अथवा अन्य नागरिक क्षति से प्रभावित प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध और उचित क्षतिपूर्ति सुनिश्चित करना है।
डॉ. सिंह ने कहा कि औपनिवेशिक आपराधिक कानूनों के स्थान पर नए कानून लागू होने के बाद सिविल कानूनों में सुधार आवश्यक है। दोषी को दंड देना ही पर्याप्त नहीं है। जिस व्यक्ति को नुकसान हुआ है, उसके जीवन को पुनर्स्थापित करना भी न्याय का हिस्सा होना चाहिए। प्रथम विधि आयोग ने वर्ष 1956 में राज्य की दायित्व-निर्धारण व्यवस्था पर कानून बनाने की सिफारिश की थी। हालांकि, वर्ष 1965 और 1967 में पेश किए गए विधेयक आगे नहीं बढ़ सके। आज भी भारत में सिविल रॉन्ग्स के संबंध में कोई व्यापक कानून नहीं है।
डॉ. सिंह ने कहा कि वर्ष 2023 में भारत में 4.8 लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं और 1.72 लाख मौतें दर्ज की गईं। इसके बावजूद गड्ढों, खुले नालों अथवा खराब डिजाइन जैसी लापरवाहियों के लिए सड़क एजेंसियों और ठेकेदारों की जवाबदेही सीमित रहती है। नवंबर 2025 तक साइबर धोखाधड़ी में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये की राशि का नुकसान सामने आया। इसमें लगभग आठ हजार करोड़ रुपये ही बचाया या जब्त किया जा सका। यूके, अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, जापान और चीन में ऐसे कानूनी ढांचे मौजूद हैं।
डॉ. सिंह ने कहा कि प्रस्तावित संहिता नागरिकों को पांच महत्वपूर्ण सवालों के स्पष्ट उत्तर देगी। इसमें किसके विरुद्ध दावा किया जा सकता है, कहां दावा किया जाए और कितने समय में दावा किया जाए, यह शामिल है। कितनी क्षतिपूर्ति मांगी जा सकती है और निर्णय होने तक अंतरिम राहत क्या उपलब्ध होगी, यह भी स्पष्ट होगा। इसमें चिकित्सा लापरवाही, खराब सड़क एवं भवन, औद्योगिक दुर्घटनाएं, डीपफेक, डेटा ब्रीच और पुलिस की ज्यादती जैसे मामलों को शामिल किया जा सकता है।