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यूपी सरकार से फायदा उठाने की जुगत में उर्दू शिक्षक

Sun, 21 Jul 2013 01:54 PM IST
लखनऊ/शैलेंद्र श्रीवास्तव
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अखिलेश सरकार में अल्पसंख्यकों की बल्ले-बल्ले है। पहले मोअल्लिम-ए-उर्दू वालों के लिए बीच का रास्ता निकाला गया, अब उर्दू शिक्षकों को प्रशिक्षित वेतनमान देने की जुगत बैठाई जा रही है।
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उर्दू शिक्षक चाहते हैं कि उन्हें बिना प्रशिक्षण प्राप्त किए ही प्रशिक्षित वेतनमान दे दिया जाए। सरकार भी चाहती है कि उनको यह फायदा दे दिया जाए। वजह लोकसभा चुनाव सिर पर है।

सरकार की इस मंशा को पूरा करने में बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं पर वे बीच का रास्ता निकालने में जुटे हैं।

उत्तर प्रदेश में समय-समय पर रही मुलायम सरकार ने बेसिक शिक्षा विभाग ने उर्दू शिक्षकों की भर्ती की थी। इन शिक्षकों को बिना प्रशिक्षण दिए ही सीधे सहायक अध्यापक बना दिया गया था।
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ये शिक्षक प्राइमरी स्कूलों में अल्पसंख्यक बच्चों को उर्दू की शिक्षा दे रहे हैं। इसमें से कई शिक्षकों की सेवा पांच साल से अधिक की हो चुकी है। इसलिए ये चाहते हैं कि इन्हें भी प्रशिक्षित वेतनमान दे दिया जाए।

प्रशिक्षित वेतनमान से एक शिक्षक को तीन से चार हजार रुपये का फायदा होता है पर उत्तर प्रदेश अध्यापक सेवा नियमावली में दी गई व्यवस्था के मुताबिक शिक्षकों को प्रशिक्षित वेतनमान प्रशिक्षण करने के उपरांत ही दिया जा सकता है।

उर्दू शिक्षकों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से अनुरोध किया था कि उन्हें पांच साल की सेवा के बाद प्रशिक्षित मानते हुए वेतनमान दे दिया जाए। मुख्यमंत्री सचिवालय में इस संबंध में उच्चाधिकारियों की कई बार बैठक हो चुकी है लेकिन अभी तक सहमति नहीं बन सकी है।

बेसिक शिक्षा अधिकारियों से बीच का रास्ता निकालने को कहा गया है। इसके पहले उर्दू-ए-मोअल्लिम वालों को शिक्षक बनाने के लिए बीच का रास्ता निकालने को कहा गया था।

बेसिक शिक्षा विभाग ने बीच का रास्ता निकालते हुए टीईटी सामान्य के स्थान पर भाषा टीईटी आयोजित कराई गई। इसलिए उर्दू शिक्षकों को प्रशिक्षित वेतनमान देने के लिए बीच का रास्ता निकालने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
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