शोध की गुणवत्ता सुधारने की कवायद में जुटे डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के विद्यार्थी ही परास्नातक शोध में कॉपी-पेस्ट का सहारा ले रहे हैं। इसका खुलासा विश्वविद्यालय द्वारा नए सत्र में प्लेगरिज्म (साहित्यिक चोरी) पर की गई सख्ती के बाद हुआ है।
हालत ये हैं कि कई विद्यार्थियों के परास्नातक शोध में प्लेगरिज्म 80 से लेकर 99 फीसदी तक मिला है। इन्हें यूजीसी के नियमों के अनुसार दोबारा सुधार कर चार महीने के बाद थीसिस जमा करने को कहा गया है।
यूजीसी किसी भी शोध में 20 फीसदी तक प्लेगरिज्म को मान्य करता है। विश्वविद्यालय ने वर्तमान सत्र में प्लेगरिज्म की जांच के लिए नए सॉफ्टवेयर लिए हैं जिनमें टर्नटिन आदि शामिल हैं। इस महीने के पहले व दूसरे सप्ताह में विश्वविद्यालय द्वारा एमटेक, एमआर्क, एमफार्मा अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के डिजर्टेशन (लघु शोध) जमा कराए गए।
नए सॉफ्टवेयर से इनकी जांच की गई तो 815 में से 214 विद्यार्थियों के लघु शोध में प्लेगरिज्म मानक से काफी ज्यादा मिले। इसकी वजह से सभी 214 विद्यार्थी वाइवा की प्रक्रिया से बाहर हो गए। खास यह भी रहा कि ऐसे विद्यार्थियों का ेइसकी जानकारी देकर सुधार करने को कहा गया। बावजूद जब ये लोग अपना शोध दूसरी बार लेकर पहुंचे तो प्लेगरिज्म मानक से ज्यादा मिली और इन्हें चार महीने के बाद फिर कंटेंट सुधार कर आवेदन करने का निर्देश दिया गया।
कॉलेजों की लापरवाही पड़ रही भारी
विद्यार्थियों के परास्नातक शोध में हो रही गड़बड़ी के लिए सर्वाधिक जिम्मेदारी संबंधित कॉलेज हैं। एक तो वे विद्यार्थी की पढ़ाई में ध्यान नहीं देते हैं, दूसरे बिना चेकिंग के शोध पर हस्ताक्षर कर देते हैं। कई कॉलेजों के पास प्लेगरिज्म चेक करने की व्यवस्था भी नहीं है। पूर्व में भी विश्वविद्यालय द्वारा इसके लिए कॉलेजों को निर्देश दिए गए, लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ।
विद्यार्थियों का शोध करेंगे ऑनलाइन
प्लेगरिज्म की बढ़ती मात्रा को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस सत्र 2019-20 से अंतिम रूप से पीजी पास होने वाले विद्यार्थियों के शोध ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है। प्लेगरिज्म सॉफ्टवेयर (रिपोजिटरी) के सर्वर पर शोध अपलोड कर देने से इनकी नकल करने की संभावना कम रहेगी।
हम शोध की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई काम कर रहे हैं। इस क्रम में विश्वविद्यालय ने प्लेगरिज्म पर सख्ती की है। इस बार कई विद्यार्थियों के शोध में 99 फीसदी तक नकल मिली है। उन्हें सुधार कर दोबारा जनवरी में शोध जमा करने को कहा गया है।
-डॉ. अनुराग त्रिपाठी, अपर परीक्षा नियंत्रक, एकेटीयू