दोनों अफसरों ने उत्तर प्रदेश स्टेट पावर सेक्टर इम्प्लाइज ट्रस्ट एवं उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन अंशदायी भविष्य निधि ट्रस्ट में जमा कार्मिकों के जीपीएफ व सीपीएफ की धनराशि का नियम विरुद्ध निजी संस्था में निवेश कर दिया। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मामला मार्च 2017 से दिसंबर 2018 के बीच का है। तब प्रवीण सीपीएफ ट्रस्ट और जीपीएफ ट्रस्ट दोनों का कार्यभार देख रहे थे।
उन्होंने तत्कालीन निदेशक वित्त सुधांशु द्विवेदी से अनुमोदन प्राप्त कर वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के 2015 के आदेश को दरकिनार करते हुए भविष्य निधि फंड की 50 प्रतिशत से अधिक राशि का डीएचएफसीएल में निवेश कर दिया। जबकि उक्त संस्था अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक की श्रेणी में नहीं आती।
ऐसे फंसी कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई
- 2631.20 करोड़ रुपये डीएचएफसीएल में निवेश
- 1185.50 करोड़ ट्रस्ट कार्यालय को मिल चुके
- 1445.70 करोड़ रुपये हासिल करना शेष और अंशदायी भविष्य निधि
- 1491.50 करोड़ किया निवेश
- 669.30 करोड़ ट्रस्ट को मिले
- 822.20 करोड़ अभी लंबित
यानी 2267.90 करोड़ रुपये (मूलधन) प्राप्त करना बाकी
पावर सेक्टर इम्पलाइज ट्रस्ट में जमा बिजलीकर्मियों के जीपीएफ व सीपीएफ की धनराशि डीएचएफसीएल में फंसने के बाद पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने अब पैसा ईपीएफओ में जमा कराने का फैसला किया है। प्रमुख सचिव ऊर्जा आलोक कुमार ने कहा कि यह केंद्र सरकार की एजेंसी है और इससे बाजार में निवेश के खतरों को कम किया जाएगा।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि कर्मचारियों का पैसा पूरी तरह से सुरक्षित है। डीएचएफसीएल में जमा धनराशि निकालने के लिए हर तरीके से प्रयास किए जा रहे हैं। अगर किसी तरह का जोखिम हुआ तो पावर कॉर्पोरेशन कर्मचारियों का पूरा पैसा वापस करेगा।
कर्मचारियों का अहित नहीं होने देंगे
मामले पर ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि भविष्य निधि की धनराशि के निवेश मामले में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार सुनिश्चित करेगी कि किसी का अहित न हो।