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64 करोड़ पार करने का मामला: मास्टरमाइंड के संपर्क में थे UPFC के अकाउंटेंट और क्लर्क, होश उड़ाने वाला खुलासा

Fri, 23 Jan 2026 09:35 AM IST
भूपेन्द्र सिंह सूरज शुक्ला, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

फर्जीवाड़ा कर यूपीएफसी के 64.82 करोड़ रुपये पार करने के मामले में होश उड़ाने वाला खुलासा हुआ है। UPFC के अकाउंटेंट और क्लर्क मास्टरमाइंड के संपर्क में थे। सीबीआई दोनों कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है। 
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64.82 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी फॉरेस्ट कॉरपोरेशन (यूपीएफसी) के दो कर्मचारी 64.82 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम देने वाले मास्टरमाइंड के सीधे संपर्क में थे। एक चीफ अकाउंटेंट और दूसरा क्लर्क है। सीबीआई मामले में दोनों की भूमिका की जांच कर रही है। बैंक अफसरों से मिलवाने में इन्हीं दोनों की भूमिका रही थी।
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धोखाधड़ी करने में कर्नाटक निवासी दीपक संजीव सुवर्णा और कानपुर का मनीष उर्फ अनीस है। दोनों नामजद आरोपी हैं। जांच एजेंसी की तफ्तीश में सामने आया कि यूपीएफसी के चीफ अकाउंटेंट वेदपाल सिंह और क्लर्क राजकुमार गौतम मनीष के संपर्क में थे। उन्होंने उसका और दीपक का परिचय बैंक में कराया था। इससे बैंक अधिकारियों को दोनों पर भरोसा हो गया था। 

जब दीपक ने खुद को यूपीएफसी का अधिकारी बताया था तो बैंक अधिकारियों ने खाता खोल दिया था। रकम भी ट्रांसफर कर दी थी। सीबीआई अब दोनों के खिलाफ साक्ष्य जुटा रही है, जिससे पता चल सके कि वेदपाल व राजकुमार की मामले में क्या भूमिका है। अगर भूमिका पायी जाती है तो उन पर भी कार्रवाई होगी।

दो करोड़ की रिकवरी बाकी

आरोपियों ने 58 करोड़ रुपये खाते में रखे थे। जबकि 6.95 करोड़ रुपये छह खातों में ट्रांसफर कर दिए थे। जब धोखाधड़ी की जानकारी हुई तो बैंक ने सबसे पहले 58 करोड़ रुपये फ्रीज कर दिए थे। जिससे वह पूरी रकम बच गई। वहीं जो छह खातों में रकम भेजी गई थी उसमें से भी चार करोड़ रुपये फ्रीज कर रिकवरी कर ली है। 2.95 करोड़ रुपये की रिकवरी बाकी है। बैंक इसकी प्रक्रिया कर रही है।

अब तक जिम्मेदारी तय नहीं

जिस तरह से शातिर आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों पर खाता खुलवाया और फिर इतनी बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली, उससे बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही उजागर हुई है। उच्चाधिकारी दावा कर रहे हैं कि मामले की जांच कराई जा रही है। इतने बड़े मामले में अब तक विभागीय कार्रवाई नहीं की गई है। 
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