संगठित अपराध रोकने के लिए यूपी सरकार की ओर से लाया गया यूपीकोका बिल और सहकारी समिति संशोधन बिल विधान परिषद में पास नहीं हो सका। दोनों प्रस्ताव प्रवर समिति से लौटने के बाद विचार के मत पर ही ध्वनि मत से गिर गया। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोंकझोंक भी हुई। अब दोनों विधेयकों को वापस विधान सभा भेजा जाएगा।
सदन के पटल पर उप्र. संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक 2017 (यूपीकोका) को रखते ही सपा के नरेश उत्तम ने एतराज जताया और कहा कि इस पर प्रवर समिति ने हमारा अनुरोध नहीं माना। बैठक को टाला जा सकता था, लेकिन सरकार नहीं मानी और कोरम पूरा करने के लिए एक सदस्य को हेलीकाप्टर भेजकर बुलाया। सरकार मनमाने ढंग से इस बिल को पास कराना चाहती है।
नेता सदन दिनेश शर्मा ने कहा कि प्रवर समिति को चुनौती नहीं दी जा सकती। क्योंकि कोरम पूरा था। अगर मतदान ही कराना था तो प्रवर समिति के सामने सपा के लोग संशोधन रखते, उस पर विचार होता। नेता विरोधी दल अहमद हसन ने कहा कि यह काला कानून है, इस लिए सपा इसका विरोध कर रही है। सरकार की ओर से डॉ. महेंद्र सिंह ने भी दलील दी।
इस पर नरेश उत्तम ने नियमों का हवाला देते हुए इस पर मतदान कराए जाने की मांग की। करीब एक घंटे चली बहस के बाद बसपा के नेता सदन सुनील कुमार चित्तौड़ ने कहा कि एक घंटे से बहस चल रही है और एक मिनट का काम है। जब बहुमत के आधार पर विधान सभा से बिल पास होकर परिषद में आया।
विधान परिषद में बहुमत के ही आधार पर इसे प्रवर समिति को सौंपा गया और प्रवर समिति से होकर यहां तक आया है तो यहां भी मतदान करा लिया जाए, सदन की जो राय हो, उस पर अमल किया जाए। इस पर नेता सदन ने कहा कि इसमें मतदान नहीं कराया जा सकता। संख्या बल के आधार पर सभापति पर दबाव नहीं बनाया जा सकता। लेकिन सभापति रमेश यादव ने विधेयक पर मतदान कराया और विधेयक पर विचार ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया गया।