सरकार ने प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और निर्माण उद्योग को बढ़ावा देने के लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस- वे को ‘इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग जोन’ घोषित किया है।
विज्ञापन
सरकार ने ‘यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति 2017’ जारी करते हुए दावा किया है कि प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का हब बनेगा। इससे न केवल 20,000 करोड़ का निवेश आएगा बल्कि 2022 तक तीन लाख लोगों को रोजगार भी मिलेगा। प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में भी वृद्धि होगी।
उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने सोमवार को नववर्ष पर इन क्षेत्रों को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग जोन घोषित करते हुए बताया कि यहां लगने वाली इकाइयों को भूमि के अतिरिक्त 5 करोड़ रुपये तक अधिकतम निवेश पर 15 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। 200 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश पर छूट की सीमा 150 करोड़ रुपये तक हो सकेगी।
विज्ञापन
yamuna express way
निवेशकों को बैंक से लिए गए ऋण के ब्याज पर 5 प्रतिशत की ब्याज की प्रतिपूर्ति सात वर्ष तक की जाएगी। इंडस्ट्री लगाने के लिए सरकारी एजेंसियों से भूमि खरीदने पर 25 प्रतिशत और स्टांप ड्यूटी में शत प्रतिशत छूट दी जाएगी। इसके अतिरिक्त स्टेट जीएसटी की भी अधिकतम दस वर्ष तक प्रतिपूर्ति की जाएगी।
इंडस्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों की सुविधा के लिए कम से कम 50 एकड़ भूमि में से 30 फीसदी का उपयोग डॉरमेट्री, कैंटीन, डिस्पेंसरी के लिए किया जाएगा।
डॉ. शर्मा ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति से प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स की स्थापना होगी। नीति से अधिकतम निवेश आकर्षित होगा, फैब इकाई की स्थापना और प्रादेशिक सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में वृद्धि होगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण संकुल स्थापित होंगे
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग जोन में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण संकुल और इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन मैन्युफैक्चरिंग (ईएसडीएम) पार्क स्थापित किए जाएंगे। इन पार्कों में नए प्रयोग और शोध के जरिए व्यावसायिक क्षेत्रों का सृजन किया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण का प्रबंधन और मॉनिटरिंग की उच्च क्षमता विकसित होगी। इसके अलावा हानिकारक पदार्थों के उपयोग पर प्रतिबंध सहित ई- अपशिष्ट के लिए रीसाइकिल उद्योग को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।
निदेशालय का गठन होगा
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स नीति के क्रियान्वयन के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स मिशन निदेशालय स्थापित किया जाएगा। इसमें एक स्थायी मिशन निदेशक, उप निदेशक, वित्त एवं प्रशासनिक अधिकारियों के अतिरिक्त कंसल्टेंट नियुक्त किए जाएंगे। मिशन निदेशालय निवेशकों से बातचीत करेगा। निवेशकों के प्रस्तावों को वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा। निवेश प्रस्ताव मंजूर होने के बाद लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी होगा। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए इवेंट, कार्यशाला, कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएंगी।
निवेशकों की सहूलियत के लिए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव के नेतृत्व में सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया जाएगा। नीति कार्यान्वयन इकाई (पीआईयू) 200 करोड़ से अधिक निवेश प्रस्ताव की समीक्षा कर इम्पावर्ड कमेटी के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
कमेटी इस पर विचार कर कैबिनेट की मंजूरी के लिए अनुशंसा करेगी। 200 करोड़ रुपये से कम का निवेश होने पर पीआईयू के स्तर से ही मंजूरी मिल सकेगी।
राज्यस्तरीय समिति करेगी मॉनिटरिंग
इलेक्ट्रॉनिक्स नीति के क्रियान्वयन की समीक्षा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित राज्यस्तरीय सशक्त समिति करेगी। समिति में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, वित्त, नियोजन, लघु उद्योग, वाणिज्यि कर, ऊर्जा, सिंचाई, आवास विकास और श्रम विभाग के अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव भी रहेंगे। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, युमना एक्सप्रेस- वे प्राधिकरण के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक भी सदस्य होंगे।