पार्टी की प्रदेश महासचिव प्रियंका गांधी की भी नेहरू भवन से दूरी हैं। उनकी यह दूरी तमाम नेताओं को कष्ट पहुंचा रही है। वह प्रदेश प्रभारी बनीं तो कांग्रेस में उत्साह बढ़ा। विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश में मौजूद रहीं। पार्टी कार्यालय से लेकर गोंडा, अयोध्या सहित विभिन्न स्थानों पर जनसभा की, लेकिन कार्यकर्ताओं का यह उत्साह माकूल चुनाव परिणाम नहीं दे पाया। आखिरकार फरवरी 2022 के बाद से वह भी नेहरू भवन को बेगाना कर दी हैं। जुलाई 2022 में लखनऊ आईं जरूर, लेकिन नेहरू भवन नहीं गईं। वह रायबरेली में कई- कई दिन रहीं। राहुल और प्रियंका गांधी का रायबरेली आवागमन वायां लखनऊ ही रहा, फिर भी प्रदेश मुख्यालय उनका इंतजार कर रहा है। इस मुद्दे पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय अलग तर्क देते हैं।
वह कहते हैं कि पूरी तैयारी के साथ राहुल गांधी का कार्यक्रम लिया जाएगा और फिर उन्हें प्रदेश मुख्यलाय बुलाया जाएगा। दूसरी तरफ पार्टी से जुड़े तमाम नेताओं को मलाल है। राहुल- प्रियंका कुछ पल के लिए प्रदेश मुख्यालय में आते और पार्टी के पुराने- नए कार्यकर्ताओं से रूबरू होते तो इसके सियासी फायदे मिलने तय हैं। पार्टी के नेता खुलकर इस मुद्दे पर बोलने को तैयार नहीं हैं, लेकिन कुरेदरे ही उनका दर्द सामने आ जाता है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ नेता ने यहां तक कहा कि पार्टी के शीर्ष पद पर बैठे नेता यह नहीं चाहते कि शीर्ष नेतृत्व से अन्य पदाधिकारी रूबरू हों। इस वजह से भी कभी दोनों शीर्ष नेताओं को बुलाने की जरूरत ही नहीं समझी गई। यही वजह है कि तमाम प्रयास के बाद भी कार्यकर्ताओं में उस तरह की एनर्जी नहीं बन पा रही है, जिसकी जरूरत है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचने पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने स्वागत किया। इस दौरान प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी, विधायक आराधना मिश्र मोना, मुकेश सिंह, अंशु अवस्थी आदि मौजूद रहे। यहां से सभी पदाधिकारी व सांसद व पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ राहुल गांधी लखनऊ कोर्ट पहुंचे। यहां कोर्ट में पेश होने के बाद वह दिल्ली लौट गए। उनके साथ प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष भी दिल्ली गए हैं।