यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा।
- फोटो : amar ujala
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने बताया कि वर्तमान में मतदाता सूची से संबंधित सभी कार्य ईसीआई नेट के माध्यम से किए जा रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक जिला निर्वाचन अधिकारी प्रतिदिन अपने डीईओ लॉग-इन से स्वयं लॉग-इन कर मतदाता सूची से संबंधित कार्यों की नियमित समीक्षा करें और ईसीआई नेट पर उपलब्ध सभी सुविधाओं का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करें। किसी भी जिले में अनावश्यक रूप से लंबित प्रकरण, निष्क्रिय यूजर, अपूर्ण प्रोफाइल, त्रुटिपूर्ण मतदाता सूची या पर्यवेक्षण में शिथिलता पाए जाने पर संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी (डीएम) की जवाबदेही निर्धारित की जाएगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने फार्म-6, फार्म-6ए, फार्म-7 और फार्म-8 के प्रकरणों की नियमित समीक्षा करने के भी निर्देश दिए हैं। कोई भी अधिकारी अपना यूजर आईडी, लॉग-इन पासवर्ड और ओटीपी किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा न करेगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को अपने अधीनस्थ अधिकारियों के मतदाता सूची संबंधी कार्यों में जरूरत के हिसाब से सुधारात्मक व दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बलरामपुर जिले के एक ग्राम पंचायत की मतदाता सूची से कथित तौर पर 32 व्यक्तियों के नाम अवैध रूप से हटाए जाने के मामले में उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग से इस संबंध में जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने संतोष कुमार और 31 अन्य लोगों द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान उनके नाम अवैध रूप से हटा दिए गए। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि बलरामपुर जिले के तुलसीपुर ब्लॉक की रूपनगर ग्राम पंचायत की अंतिम पंचायत मतदाता सूची 2025 में उनके नाम शामिल नहीं किए गए , जबकि वे वहां के निवासी हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मामले में प्रतिवादी बनाया गए 48 लोगों के नाम अवैध रूप से मतदाता सूची में जोड़ दिए गए , जबकि वे गांव में नहीं रहते थे। इसपर कोर्ट ने प्रतिवादी 48 लोगों को नोटिस जारी किया है।
न्यायालय ने उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त (पंचायत और स्थानीय निकाय), राज्य निर्वाचन आयोग और एक अन्य को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।कोर्ट ने निर्देश दिया कि हलफनामे में याचिकाकर्ताओं के नाम हटाने और 48 लोगों (प्रतिवादी संख्या 6 से 53) के नाम जोड़ने का आधार बताया जाए और उसे रिकॉर्ड पर लाया जाए। अदालत ने इस मामले को पहले दस मामलों के अंतर्गत 15 दिसंबर, 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।