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UP: अमित शाह का दौरा बताएगा यादव सिंह की चुनावी भूमिका

Thu, 04 Feb 2016 11:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का इसी महीने उत्तर प्रदेश का दौरा नोएडा घोटाले के आरोपी यादव सिंह की चुनावी भूमिका भी बता देगा।
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साथ ही यूपी के 2017 के चुनावी समर के लिए भाजपा के एजेंडे का भी काफी हद तक संकेत दे देगा।

यह भी पता चल जाएगा कि विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा किस तरह की बिसात बिछाने की तैयारी कर रही है।

वैसे तो अमित शाह के इस महीने उत्तर प्रदेश में होने वाले सभी कार्यक्रम पूरी तरह राजनीतिक नहीं हैं। 8 फरवरी को मथुरा की उनकी यात्रा पूरी तरह धार्मिक आयोजन तक सीमित रहने वाली है तो 24 फरवरी को बहराइच व बलरामपुर की यात्रा भी आधी राजनीतिक तो आधी सामाजिक सरोकारों तक ही सीमित रहेगी, पर भगवा खेमे की मानें तो यह यात्रा भाजपा के भावी पदचापों की बहुत कुछ आहट दे जाएगी।

अमित शाह के दौरे से ये मिलेंगे संदेश

शाह दूसरी बार राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश आ रहे हैं। भले ही उनका आगमन सार्वजनिक तौर पर बहुत बड़े राजनीतिक आयोजन जैसा न हो, लेकिन भगवा टोली के सूत्रों की मानें तो वे इस यात्रा में किसी न किसी बहाने भाजपा के भावी एजेंडे का संदेश जरूर देना चाहेंगे।

यह काम वे सपा, बसपा और कांग्रेस सहित भाजपा विरोधी सभी दलों पर हमला बोले बिना तो कर ही नहीं पाएंगे। बस देखने वाली बात यह होगी कि सपा व बसपा पर हमले के दौरान नोएडा घोटाले के प्रमुख किरदार यादव सिंह को लेकर उनका रुख कैसा रहता है।

अगर वे इसका जिक्र करते हैं तो साफ हो जाएगा कि 2017 के चुनाव में भाजपा के लिए यादव सिंह प्रकरण भी हथियार होगा। वह इसके बहाने सपा-बसपा के नेताओं को घेरे बिना नहीं रहेगी।

वहीं, अमित शाह अगर यादव सिंह का नाम लिए बिना अपना दौरा पूरा करते हैं तो यह साफ हो जाएगा कि चुनाव में भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाने के बावजूद भाजपा उसका इस्तेमाल सपा-बसपा के लिए रिमोट कंट्रोल की तरह करेगी।
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इस तरह भी मुद्दे को धार

शाह बलरामपुर में भाजपा के जिस जिला कार्यालय का शिलान्यास करने आ रहे हैं, उसका नामकरण अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर हो रहा है। सभी को पता है कि लखनऊ की तरह ही बलरामपुर भी अटल का घर माना जाता है।

राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि अमित शाह अगर अटल के नाम वाले जिला कार्यालय के शिलान्यास के लिए बलरामपुर जा रहे हैं तो जाहिर है भाजपा के रणनीतिकार शाह के बहाने कहीं न कहीं यह संदेश देना चाहते हैं कि कुछ भी कहा जाए लेकिन अटल को भाजपा भूली नहीं है।

जहां तक महाराजा सुहेलदेव की प्रतिमा के अनावरण और उसके बाद शाह की सभा का सवाल है तो इसके पीछे भी कहीं न कहीं सियासी एजेंडा सेट करने का संदेश निकल रहा है।

सुहेलदेव को पासी और राजभर बिरादरी के लोग अपना-अपना मानते हैं। न सिर्फ बहराइच व बलरामपुर, बल्कि पूरे अवध में दलितों में जाटव के बाद पासी बिरादरी ही सबसे ज्यादा है। यही नहीं, सुहेलदेव हिंदुत्व के एजेंडे पर भी भाजपा को मदद पहुंचा सकते हैं।

ऐसा लगता है उनकी प्रतिमा का अनावरण करने के सहारे भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि उसके एजेंडे में दलित महापुरुषों का सम्मान तो है ही, साथ ही हिंदुत्व के एजेंडे का भी उसे ध्यान है।
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