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UP: तीन महीने में पंचायत चुनाव कराने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे ग्राम प्रधान, ओबीसी आरक्षण की मांग

Thu, 15 Oct 2026 11:05 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Panchayat elections in UP: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 अक्तूबर को सरकार को निर्देश दिया था कि वह तीन महीने के अंदर प्रदेश में चुनाव कराए। अब इस फैसले को प्रधान चुनौती देंगे।
 
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यूपी में पंचायत चुनाव। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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यूपी में तीन महीने में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने के हाईकोर्ट के फैसले को ग्राम प्रधान सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। वह ओबीसी आरक्षण को पूरी तरह लागू करने के बाद ही पंचायत चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। वहीं सरकार भी हाईकोर्ट के निर्णय पर विधिक राय लेने में जुटी हुई है।
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राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने गुरुवार को कहा कि हम उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हैं कि उसने प्रधान को प्रशासक बनाने के सरकार के निर्णय को सही ठहराया। यह चुनाव तक प्रशासक रहेंगे लेकिन तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराए जाने के हाईकोर्ट के निर्णय का हम विरोध करेंगे। 

सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ संगठन याचिका दायर करेगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में सर्वोच्च न्यायाल के एक निर्णय के अनुसार ही पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण दिए जाने की व्यवस्था हुई और उप्र सरकार ने इसके लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग बनाया। आयोग को 75 जिलों का दौरा करना है और ओबीसी आरक्षण पर रिपोर्ट देनी है। 
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अभी तक 10 जिलों के आंकड़े भी सार्वजनिक नहीं हुए हैं। ऐसी स्थिति में आरक्षण का क्रियान्वयन संभव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत व विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची में विसंगति है। ऐसे में जल्दबाजी में चुनाव कराना ठीक नहीं है। वहीं दूसरी ओर पंचायती राज विभाग के वरिष्ठ अधिकारी गुरुवार को हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन करने में जुटे रहे। सरकार भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जा सकती है।
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