लोग आरोपी के पीछे दौड़े, लेकिन वह भाग निकला
हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शी आरोपी को पकड़ने के लिए शोर मचाते हुए उसके पीछे दौड़े, लेकिन वह भाग निकला। ग्रामीणों ने श्यामलाल, रूमन, पीहू, अभिनव, मिष्ठी और माया देवी को सीएचसी पहुंचाया। वहां से श्यामलाल को बलरामपुर अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां उनकी मौत हो गई। वहीं, रूमन का पैर टूट गया। अन्य लोग मामूली रूप से चोटिल हुए और प्राथमिक उपचार के बाद सभी को छुट्टी दे दी गई।
मालिक पर धमकाने और चाचा पर साजिश का आरोप
श्यामलाल के बेटे मुकेश ने बताया कि पिता की मौत के बाद वह शिकायत करने थाने जा रहे थे। आरोप है कि रास्ते में डाला मालिक कसमंडी निवासी अकील ने उन्हें रोककर परिवार को जान से मारने की धमकी दी। मुकेश का यह भी आरोप है कि घटना की साजिश में चालक फरजान के चाचा डॉ. शकील की भूमिका है।
इंस्पेक्टर मलिहाबाद सुरेंद्र सिंह भाटी ने बताया कि आरोपी चालक फरजान, अकील अहमद और डॉ. शकील के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास, षड्यंत्र रचने और धमकी देने की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपी चालक को हिरासत में लेकर डाला बरामद कर लिया गया है। घटना के बाद तनाव की स्थिति को देखते हुए मलिहाबाद, रहीमाबाद और माल थानों की पुलिस फोर्स गांव में तैनात की गई है।
शव रखकर परिजनों ने सड़क जाम की, कार्रवाई की मांग
मंगलवार दोपहर तीन बजे श्यामलाल के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद डॉक्टरों ने शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। परिजन शव लेकर गांव के लिए निकले। गांव के पास नबीपनाह और अंधे की चौकी जाने वाली रोड पर उन्होंने शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी, उनका एनकाउंटर, आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाने और मृतक के परिजनों को मुआवजे के तौर पर चार बीघा जमीन दिलाने की मांग की। प्रदर्शन की खबर पाकर पूर्व सांसद कौशल किशोर भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने श्यामलाल के परिजनों से बातचीत की और मदद का आश्वासन दिया। इसके बाद वह वहां से चले गए। पूर्व सांसद सेे मिले आश्वासन के बावजूद भी नाराज परिजन शांत नहीं हुए और प्रदर्शन जारी रखा।