प्रदेश सरकार ने पंचम राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत ग्रामीण व शहरी निकायों को राज्य के शुद्ध कर राजस्व का 12.5 प्रतिशत हिस्सा देने का फैसला किया है। इसमें से नगरीय निकायों की 60 व ग्रामीण निकायों की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। सरकार ने संस्तुतियों को एक अप्रैल-2020 से ही लागू करने का एलान किया है।
राज्य विधान परिषद के पटल पर शुक्रवार को राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों पर राज्य सरकार के निर्णय से संबंधित प्रतिवेदन रखा गया। आयोग ने निकायों को शुद्ध कर राजस्व का 15 प्रतिशत देने की सिफारिश की थी लेकिन सरकार ने 12.5 प्रतिशत ही देने का फैसला किया। इसी तरह आयोग ने नगरीय निकायों को मिलने वाले 60 प्रतिशत अंश में से नगर निगमों, पालिका परिषदों व नगर पंचायतों को 40:40:20 अनुपात में आवंटन प्रस्तावित किया था। पर सरकार ने इसे क्रमश: 45:35:20 के अनुपात में देने का फैसला किया है।
इसी तरह आयोग ने ग्रामीण पंचायतों को मिलने वाले 40 प्रतिशत हिस्से में से जिला, क्षेत्र व ग्राम पंचायतों को क्रमश: 25:10:65 अनुपात में वितरित करने की संस्तुति की थी। लेकिन, सरकार ने इसे क्रमश: 15:15:70 के अनुपात में वितरण का फैसला किया है। निकायों के बीच राशि वितरण में 90 प्रतिशत जनसंख्या व 10 प्रतिशत क्षेत्रफल का भार दिया जाएगा। ब्यूरो
राज्य वित्त आयोग ने संविधान के अनुच्छेद-243 डब्ल्यू के अंतर्गत 12वीं सूची में शामिल सभी 18 विषयों को स्थानीय निकायों को हस्तांतरित करने की सिफारिश की थी। इनमें शासन प्रणाली के सुदृढ़ीकरण, वित्तीय प्रबंधन सुधार, नगरीय सेवाओं के प्रभावी व गुणवत्ता युक्त वितरण तथा वित्तीय संसाधनों के प्रभावी नीति निर्धारण जैसे काम शामिल हैं।
सरकार ने स्वावलंबी व उत्तरदायी स्वायत्तशासी सरकार के रूप में स्थानीय निकायों को विकसित करने के लिए इस सिफारिश को स्वीकार कर लिया है। सरकार ने कहा है कि नगर विकास विभाग इस संस्तुति का परीक्षण कर कार्यवाही करेगा। इसी तरह ग्रामीण पंचायतों को कार्य, कर्मी व कोष का हस्तांतरण किया जाएगा।