(आशीष गुप्ता)। देश में शराब के साथ अब लोग सेहत का भी ध्यान रख रहे हैं। यही वजह है। कि शराब की 52 प्रतिशत खपत के बाद बीयर की 48 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वहीं, अभी केवल 0.4 प्रतिशत की खपत वाली वाइन इंडस्ट्री हर साल 3-4 प्रतिशत की दर से तेजी से बढ़ रही है।
विदेशी बाजारों में जहां वाइन का बोलबाला है, वहीं भारत में यह उभरता हुआ विकल्प बन रहा है। अगर सरकारी नीतियों का साथ मिले तो प्रदेश में वाइन इंडस्ट्री फल फूल सकता है। लखनऊ के गोमतीनगर स्थित आईजीपी में आयोजित एक सम्मेलन में उद्यमियों ने कहा कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, सिक्किम की तरह यूपौ में भी माइक्रोवेवरी, जीरो एल्कोहल बीयर, व डोर स्टेप डिलीवरी की सुविधा दी जाए। साथ ही, अन्य राज्यों में भेजने पर लगने वाला 150 प्रतिशत टैक्स खत्म कर निर्यात को बढ़ावा देने की बात कही गई।
सरकारी नीतियों का साथ मिले तो प्रदेश में तेजी से बढ़े वाइन इंडस्ट्री
इंटरनेशनल स्प्रिट्स एंड वाइन एसोसिएशन में टैक्स एडवाइजर सुरेश मेनन का कहना है कि वाइन के क्षेत्र में सरकार को स्पष्ट नीति बनाने की जरूरत है। कर्नाटक की तरह साल में एक ही दुकानदार को लाइसेंस का रिन्यू करना चाहिए।
- माधवेंद्र देव सिंह का कहना है कि माल ब्लाक में हाल ही में वाइन की इंडस्ट्री लगाई है। आम, शहतूत, नींबू, पुदीना और शहद के मिश्रण से वाइन बनेगी। अगले एक महीने में बाजार में उत्पाद लॉन्च हो जाएगा।
- ग्लोबस स्पिरिट लिमिटेड के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अमिताभ सिंह का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में शराब में इस्तेमाल होने वाली एल्कोहल की शुद्धता बढ़ी है, जिससे सेहत को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचता है। स्पिरिट बाजार और आगे बढ़ेगा।
- उद्यमी अश्विन रोड्रिग्स का कहना है कि यूपी में आम, केला, अमरूद बहुतायत में है, जिसके पल्प से वाइन बन सकती है। महाराष्ट्र की तरह यूपी में एक्शन प्लान बनाया है, जिसे आबकारी विभाग को सौंपा गया है।