फर्जी आईडी बनाकर कराते थे प्रमोट
डीसीपी दीक्षा के मुताबिक, पूछताछ में सूरज ने बताया कि आकाश ने फर्जी एपल कस्टमर सपोर्ट नंबर 0008001009009 बनाया था। उसी ने गूगल पर भुगतान कर फर्जी नंबर को प्रमोट कराया था। जब अमेरिका के नागरिक गूगल पर दर्शाए गए फर्जी नंबर पर कॉल करते थे तो आकाश उसे वीओआईपी सिस्टम के जरिये कॉल सेंटर तक पहुंचाता था।
फिर विवेक डालयर की मदद से अमेरिकन का डेटा वेरीफाई करता था, जिसके बाद उन्हें डरा धमका कर रकम की उगाही की जाती थी। आरोपी छह माह से कॉल सेंटर चला रहे थे। वे रोजाना पांच हजार डॉलर ठगते थे। इस हिसाब से आरोपी छह माह में दस करोड़ की ठगी कर चुके थे।
एजेंटों को नहीं थी ठगी की जानकारी
पूछताछ में सूरज ने बताया कि नेपाल और विभिन्न राज्यों में बैठे उनके एजेंट को ठगी की जानकारी नहीं होती थे। उन्हें सिर्फ यह बताया जाता था कि वे अमेरिका की एक वैद्य कंपनी की कस्टमर सपोर्ट सेवा में काम करते हैं। इसके लिए उन्हें भुगतान भी किया जाता था।
डीसीपी ने बताया कि चारों की गिरफ्तारी के बाद कॉल सेंटर के लिए काम करने वाले 10 एजेंट को उत्तराखंड, नौ महाराष्ट्र, गुजरात और नागालैंड से तीन-तीन, असम व मणिपुर से दो-दो, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, त्रिपुरा, मध्यप्रदेश, उप्र व नेपाल से एक-एक एजेंट को हिरासत में लिया गया है। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है। कार्रवाई में चिनहट और बीबीडी थाने की पुलिस का भी योगदान रहा।
क्या होता है वीओआईपी
वीओआईपी (वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) यह ऐसी तकनीक होती है, जो इंटरनेट कनेक्शन का उपयोग करके वॉयस कॉल करने की अनुमति देती है। यह आपकी आवाज को डिजिटल डेटा पैकेट में बदलकर इंटरनेट के माध्यम से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचा देती है।