विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अनुसूचित जाति के लोगों को लुभाने के लिए अब भाजपा ने भी मायावती जैसा दांव चला है। भाजपा को चुनाव में इसका कितना फायदा होगा यह तो बाद में ही पता चलेगा, लेकिन इतना तो है कि उसके इस दांव ने बसपा खेमे में खलबली जरूर मचा दी है। मायावती की प्रतिक्रिया इसका प्रमाण है। जिन्होंने भाजपा को आड़े हाथ लेते हुए इसे नाटकबाजी और छलावा बता दिया। मायावती ने योगी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि डॉ. आंबेडकर व उनके करोड़ों शोषित-पीड़ित अनुयाइयों की उपेक्षा व उत्पीड़न करते रहने के बाद अब विधानसभा चुनाव नजदीक देख यूपी की भाजपा सरकार का बाबा साहेब के नाम पर सांस्कृतिक केंद्र का शिलान्यास कराना, यह सब नाटकबाजी नहीं तो और क्या है?
प्रतीकों की सियासत
प्रतीकों की सियासत प्रदेश की राजनीति का अहम हिस्सा रही हैं। लंबे समय से सियासी दल अलग-अलग महापुरुषों के नाम, काम और मूर्तियों के सहारे ही संबंधित धर्म, जाति और वर्ग को जोड़ने का प्रयास करते हैं। अनुसूूचित जाति के बीच पैठ बनाने के लिए भाजपा डॉ. आंबेडकर को प्रतीक बनाकर संदेश देने में जुटी है। इतना ही नहीं अनुसूचित जाति के लोगों के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की योजनाओं के सहारे भी भाजपा इस वर्ग के लोगों के बीच पकड़ व पहुंच बनाने में जुटी है। इसके लिए पार्टी के अनुसूचित जाति के नेताओं को ही आगे किया गया है। यह बताने की कोशिश की जा रही है कि केंद्र की मोदी और प्रदेश की योगी सरकार सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास के संकल्प के साथ गरीबों, वंचितों, शोषितों, अनुसूचित जाति के लोगों के जीवन को आर्थिक व सामाजिक स्तर पर ऊंचा उठाने के लिए लगातार काम कर रही है। भाजपा अपनी इस मुहिम में कितना कामयाब होती है यह चुनाव नतीजे ही बताएंगे।