शिक्षा विभाग ने कहा- बिना अनुमति लगाए तो खुद हटाएं
मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने बिजली विभाग से विद्यालय परिसर से ट्रांसफार्मर हटाने को कहा। खबर प्रकाशित होने के बाद बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार ने ट्रांसफार्मर हटाने के लिए बिजली विभाग के अधिकारियों को तीन पत्र लिखे।
वहीं, बिजली विभाग की ओर से शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर ट्रांसफार्मर हटाने के लिए तीन लाख रुपये की मांग की गई थी। तत्कालीन डीआईओएस का कहना था कि यदि ट्रांसफार्मर लगाने के लिए अनुमति ली गई होती तो बजट देने की बात समझ में आती, लेकिन बिना अनुमति सरकारी विद्यालय की जमीन पर ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं तो उन्हें हटाने का खर्च बिजली विभाग को ही वहन करना चाहिए। अमर उजाला की ओर से मामले का लगातार फॉलोअप किए जाने के बाद आखिरकार दोनों ट्रांसफार्मर बिना किसी भुगतान के हटा दिए गए।
बच्चों ने कहा- मैदान में खेलने से भी लगता था डर
ट्रांसफार्मर विद्यालय के मैदान और गेट के पास लगे होने से बच्चों को खेलते और स्कूल से निकलते समय डर रहता था। सोमवार को जब बच्चे स्कूल पहुंचे तो गेट के पास ट्रांसफार्मर नहीं देखकर उन्होंने राहत की सांस ली। विद्यालय की प्रधानाध्यापक नीलम वर्मा और बच्चों ने इस मामले को प्रमुखता से उठाने के लिए अमर उजाला को धन्यवाद दिया।
तत्कालीन डीआईओएस ने लिखे 3 पत्र, जिद पर अड़ा था बिजली विभाग
खबर छपने के बाद बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार ने कॉलेज के भीतर से ट्रांसफार्मर हटाने के लिए बिजली विभाग के अधिकारियों को तीन पत्र लिखे थे। बिजली विभाग में भी विभाग शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर बजट की मांग की थी।
इस पर जिला विद्यालय में शिक्षक रहे राकेश कुमार का कहना था कि यदि ट्रांसफार्मर लगाने की अनुमति ली गई होती तब तो बजट देना बनता था। बिना अनुमति के ट्रांसफार्मर लगाए गए इसलिए बिजली विभाग खुद से हटाए। अमर उजाला में लगातार इसका फॉलोअप किया जिसके बाद विभाग को ट्रांसफार्मर हटाने पड़े।