परिवहन विभाग की ओर से चिह्नित सर्वाधिक हादसे वाले 20 जिलों में वर्ष 2023 की अपेक्षा 2024 में मृत्युदर आगरा में 17.4 फीसदी बढ़ी है। हरदोई में 6.7 फीसदी, मथुरा में 6.9 फीसदी, लखनऊ में 1.4 फीसदी, सीतापुर में 7.3 फीसदी, उन्नाव में 11.2 फीसदी, बदायूं में 12.5 फीसदी बढ़ी। मृत्युदर घटाने में कानपुर नगर अव्वल रहा। यहां 12.2 फीसदी की गिरावट हुई है। गोरखपुर में 11.9 फीसदी, बरेली में सात फीसदी, बुलंदशहर में 5.9 फीसदी, प्रयागराज में 6 फीसदी हादसे कम हुए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आगरा में अन्य पड़ोसी राज्यों का दवाब होने से भी हादसे बढ़े हैं। इसलिए मृत्युदर अधिक है। कानपुर नगर में मेट्रो की शुरुआत, जीटी रोड के चौड़ीकरण और पुलिस व परिवहन विभाग की चौकसी से मृत्युदर घटी है।
रफ्तार से मरने वालों की संख्या नौ फीसदी बढ़कर 40 से 49 फीसदी हो गई है। गाड़ी चलाते हुए मोबाइल पर बात करने से सात फीसदी की मौत हुई है। ऐसे ही गलत दिशा में गाड़ी चलाने से 12 फीसदी, रेड लाइट तोड़ने की वजह से एक फीसदी की मौत हुई है। 23 फीसदी की मौत की वजह अलग-अलग है।
प्रदेश में सड़क हादसे कम करने के लिए निरंतर प्रयास हो रहे हैं। दुर्घटना बहुल 20 जिलों पर विशेष फोकस है। एक्सप्रेसवे व अन्य मार्गों पर गश्त बढ़ाई गई है। युवाओं की जागरूकता के लिए अभियान चल रहा है। हादसे रोकने के लिए विभिन्न विभागों के समन्वय की नई रणनीति अपनाई जा रही है।- पीएस सत्यार्थी, अपर आयुक्त परिवहन (सड़क सुरक्षा)