फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: पिता और नानी-दादी के शरीर का स्पर्श बच्चों को दे रहा 'जीवनदान', कंगारू मदर केयर बना 'वरदान'

Sat, 16 May 2026 01:31 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में कंगारू मदर केयर नवजात शिशुओं के लिए जीवनदान साबित हो रही है। समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले बच्चों को मां के साथ पिता, दादी और नानी भी शरीर की गर्माहट देकर स्वस्थ बना रहे हैं। इस विधि से बच्चों का वजन बढ़ रहा है और उनकी सेहत तेजी से सुधर रही है।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : istock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सरकारी अस्पतालों में कंगारू मदर केयर (केएमसी) नवजात शिशुओं की जान बचाने में कारगर साबित हो रही है। यह विधि केवल मां ही नहीं, बल्कि पिता, नानी और दादी जैसे परिवार के सदस्य भी दे रहे हैं। समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले बच्चों के लिए यह एक वरदान है।

विज्ञापन


किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. शालिनी त्रिपाठी ने इसे बिना खर्च का आसान और प्रभावी तरीका बताया। केएमसी 90 फीसदी तक शिशुओं की स्थिति सुधारने, स्तनपान बढ़ाने और वजन वृद्धि में बेहद प्रभावी है। 

डॉ. असद अली के अनुसार, प्रदेश में हर 1000 में से करीब 43 नवजात का जन्म 2500 ग्राम से कम वजन के साथ होता है। ऐसे बच्चों को बचाना मुश्किल होता है, पर केएमसी सहायक है। प्रदेश में 314 केएमसी लाउंज स्थापित हैं। 
विज्ञापन


वर्ष 2025-26 में 93158 शिशुओं को केएमसी विधि से सेहत मिली। केएमसी में शिशु को टोपी, मोजे और लंगोट पहनाकर परिवार का सदस्य उसे अपने सीने से त्वचा-से-त्वचा संपर्क में रखता है। इससे शिशु को प्राकृतिक गर्माहट, सुरक्षा और पोषण मिलता है। एक बार में कम से कम एक घंटे तक केएमसी देना लाभकारी होता है।

परिवार का मिला सहयोग

आगरा की मीनू के बच्चे को आठ घंटे रोज केएमसी की जरूरत थी। शारीरिक कमजोरी के कारण मीनू यह नहीं कर पा रही थी। तब बच्चे की दादी मीरा और नानी नीलम ने यह जिम्मेदारी संभाली। नर्स ने उन्हें प्रशिक्षित किया और चार दिन में बच्चे का वजन 230 ग्राम बढ़ गया। बच्चा अब सक्रिय है और स्तनपान भी करने लगा है।

पिता ने पेश की मिसाल

बहराइच में राजेश नाम के पिता ने अपने नवजात बेटे को बचाने के लिए अनोखी मिसाल पेश की। जन्म के समय बेटे का वजन दो किलोग्राम था, जो चार दिन में घटकर 1.90 किलोग्राम हो गया। बच्चे की मां को कान दर्द और बुखार था, इसलिए वह केएमसी नहीं दे पाईं। राजेश ने 25 दिन तक बच्चे को केएमसी दी। यह दर्शाता है कि परिवार के अन्य सदस्य भी केएमसी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

विज्ञापन

 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें