अपार आईडी बनाने में आ रही हैं समस्याएं।
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शिक्षा मंत्रालय की पहल पर प्रदेश में स्कूली विद्यार्थियों की ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (अपार) आईडी बनाने को लेकर चल रहा अभियान अपेक्षित नहीं पकड़ रहा है। तमाम कवायद के बाद भी अभी तक 54.27 फीसदी ही विद्यार्थियों की आईडी बन पाई है। जबकि 46.73 फीसदी छात्रों की अभी भी बनाया जाना बाकी है।
प्रदेश के बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों में पिछले कई महीनों से इसको लेकर अभियान चलाया जा रहा है। सरकारी विद्यालयों में तो काफी विद्यार्थियों की आईडी बन गई लेकिन निजी विद्यालय तमाम प्रयास के बाद भी इसमें अपेक्षित रुचि नहीं ले रहे हैं। इसकी वजह से इसकी गति काफी धीमी है। जबकि सीबीएससी बोर्ड की तरफ से भी विद्यालयों को इसके लिए पत्र भेजा गया है।
प्रदेश स्तर पर हाल ही में जारी डाटा के अनुसार सर्वाधिक पेंडेंसी अभी भी कानपुर नगर से 68.33 फीसदी, मुरादाबाद से 59.56 फीसदी, आगरा से 59.56 फीसदी, बलिया से 57.31 फीसदी, मेरठ में 57.28 फीसदी, आजमगढ़ में 57.25 फीसदी, कन्नौज में 56.98 फीसदी, गाजीपुर में 55.95 फीसदी है। जबकि सबसे कम पेंडेंसी चित्रकूट में 27.43 फीसदी, पीलीभीत में 27.85 फीसदी, कौशांबी में 28.95 फीसदी, महोबा में 29.82 फीसदी, हमीरपुर में 31.74 फीसदी है।
पेंडेंसी में अपेक्षित सुधार न करने पर अब राज्य परियोजना कार्यालय इसके लिए सख्ती भी करने की तैयारी कर रहा है। क्योंकि निजी विद्यालयों में जब तक अपार आईडी बनाने की गति नहीं बढ़ेगी तब तक इसमें सुधार नहीं आएगा। वहीं शिक्षकों का यह भी कहना है कि काफी संख्या में शिक्षक-अधिकारी अब बोर्ड परीक्षा की तैयारियों में लग गए हैं, इसकी वजह से भी अब आईडी बनाने की गति धीमी पड़ गई है। वहीं जो कमियां थीं, विभाग स्तर पर इसे दुरुस्त नहीं किया जा सका है।