मुख्य टीम के अलावा मोर्चों में हुईं नियुक्तियां भी सवालों के घेरे में हैं। खासतौर पर युवा मोर्चे की टीम के चेहरे पर सवाल उठ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि चुनावी साल में भाजपा काडर के पुराने राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले प्रांशु दत्त द्विवेदी को हटाकर एक अनुभवहीन व्यक्ति को युवा मोर्चा की कमान सौंपना भी समझ से परे है। देखा जाए तो प्रांशु को हटाने से नई टीम में कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र से कोई प्रभावशाली ब्राह्मण चेहरा नहीं रह गया है।
भूपेंद्र चौधरी की मुख्य टीम में एक राज्यसभा सांसद को मिलाकर कुल 15 विधायक व एमएलसी को उपाध्यक्ष, महामंत्री और मंत्री बनाया गया था। नई टीम में इनमें से राज्यसभा सांसद अमरपाल मौर्या के अलावा विधायक पंकज सिंह, एमएलसी विजय बहादुर पाठक, संतोष सिंह, सलिल विश्नोई, मानवेंद्र सिंह, पद्मसेन चौधरी, गोविंद नारायण शुक्ला, अनूप गुप्ता, सुभाष यदुवंश और सुरेश पासी को तो संगठन से मुक्त कर दिया। पर, सत्यपाल सैनी, मोहित बेनीवाल, डॉ. धर्मेंद्र सिंह और विजय शिवहरे को दोबारा टीम में स्थान दिया गया है।